नौकरी नहीं, जीवनसाथी की तलाश में मंदिर पहुंचे 7 हजार लोग... हाईवे तक लगी कतार

Edited By Updated: 02 Nov, 2026 12:09 PM

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केरलम के कोझिकोड के पास करणथुर स्थित हरहर महादेव मंदिर में निःशुल्क विवाह पंजीकरण शिविर के आयोजकों ने 1,500 आवेदन पत्रों की व्यवस्था की थी और उन्हें सामान्य संख्या में लोगों के आने की उम्मीद थी। ले

कोझिकोड: केरलम के कोझिकोड के पास करणथुर स्थित हरहर महादेव मंदिर में निःशुल्क विवाह पंजीकरण शिविर के आयोजकों ने 1,500 आवेदन पत्रों की व्यवस्था की थी और उन्हें सामान्य संख्या में लोगों के आने की उम्मीद थी। लेकिन उनकी उम्मीदों के विपरीत 1 नवंबर को करीब 7,000 लोग शिविर में पहुंच गए, जिनमें कई लोग जीवनसाथी की तलाश में दूर-दराज के जिलों से आए थे। लोगों की भीड़ इतनी थी कि कुछ ही घंटों में आवेदन पत्र खत्म हो गए। आयोजकों को पहले उनकी फोटोकॉपी करानी पड़ी और बाद में हजारों अतिरिक्त प्रतियां छपवाने के लिए प्रिंटिंग प्रेस से संपर्क करना पड़ा। मंदिर के बाहर लोगों की कतार परिसर से आगे निकलकर नेशनल हाईवे पर दो बस स्टॉप तक पहुंच गई।

भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात प्रभावित होने के कारण स्थिति संभालने के लिए पुलिसकर्मियों को बुलाना पड़ा। मंदिर पहुंचे कई लोगों के लिए यह शिविर वर्षों से जीवनसाथी की तलाश में जुटे लोगों के लिए एक उम्मीद बनकर आया। सोशल मीडिया पर दो सप्ताह पहले इसकी घोषणा की गई थी, जिसके बाद व्हाट्सऐप और फेसबुक के जरिए इसकी जानकारी पूरे केरलम में फैल गई। कन्नूर, वायनाड और पलक्कड समेत कई जिलों से लोग यहां पहुंचे।

कुछ लोगों ने शिविर में शामिल होने के लिए शहर में कमरे भी बुक कराए थे। सुबह नौ बजे शुरू होने वाला शिविर भीड़ को देखते हुए दो घंटे पहले ही शुरू कर दिया गया। चार घंटे का यह कार्यक्रम शाम तक चला। आयोजकों के मुताबिक, पंजीकरण कराने वालों में करीब 80 प्रतिशत पुरुष थे। इनमें 30 वर्ष से अधिक उम्र के कई लोग शामिल थे, जबकि कुछ की उम्र 40 और 50 वर्ष भी थी। आवेदन करने वाली कई महिलाएं दूसरी शादी के लिए जीवनसाथी तलाश रही थीं। एक महिला ने बताया कि वह अपने बेटे के लिए दुल्हन तलाश रही थीं और उन्हें उम्मीद है कि इस शिविर से उनकी तलाश पूरी हो सकती है। मंदिर समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह पहल धार्मिक गतिविधियों से आगे बढ़कर सामाजिक सेवा करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। समिति आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और मरीजों की मदद भी करती है। एक प्रतिनिधि ने कहा कि शुरुआत में 1,500 से 2,000 लोगों के आने की उम्मीद थी, लेकिन प्रतिक्रिया कहीं अधिक रही। उन्होंने कहा कि कई माता-पिता अपने बेटों के लिए उपयुक्त जीवनसाथी नहीं मिलने से परेशान हैं।

आवेदन पत्र खत्म होने पर आयोजकों ने चार हजार अतिरिक्त प्रतियां छपवाईं, ताकि दूर-दराज से आए लोगों को वापस न लौटना पड़े। समिति अब आवेदकों की सूची तैयार कर उन्हें उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। इसमें 10 से 20 दिन लग सकते हैं और आवेदकों को अगले महीने की पहली तारीख से जवाब मिलने की उम्मीद है। आयोजकों ने 22 नवंबर के बाद हर रविवार सुबह सात से 10 बजे तक शिविर आयोजित करने का फैसला किया है। समिति का मानना है कि जीवनसाथी तलाशने में परेशान लोगों की मदद के लिए दूसरे मंदिर भी ऐसी पहल कर सकते हैं। 

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