Edited By ,Updated: 10 Jan, 2016 12:23 PM

पठानकोट हमले में भारत के सात जवान देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। इनमें से एक थे लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार।
नई दिल्ली: पठानकोट हमले में भारत के सात जवान देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। इनमें से एक थे लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार। निरंजन कुमार ने देश के लिए कर्बान होते हुए कभी सोचा भी नहीं होगा कि उसकी शहादत पर एेसे सवाल उठाए जाएंगे। दरअसल अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ ने निरंजन कुमार की शहादत पर सवाल उठाए हैं। निरंजन पठानकोट हमले में आतंकी के शव से बंधे ग्रेनेड को अलग करने के दौरान हुए विस्फोट में शहीद हो गए थे।
द टेलीग्राफ ने अपने एक लेख में लिखा है कि 'शहीद अपने पीछे रहस्य छोड़ जाते हैं, लेकिन यह भी संभव है कि कुछ बाते सच हों। जब कोई भी व्यक्ति सशस्त्र बल में शामिल होता है तो वह अपना जीवन दांव पर लगा चुका होता है। कोई भी सैनिक अथवा सेना का अधिकारी अपनी ड्यूटी पूरी करते वक्त मर सकता है। लेकिन क्या सभी सेना के जवान जो अपनी ड्यूटी निभाते वक्त मारे जाते हैं, उन्हें शहीद का दर्जा देना उचित है?'
टेलीग्राफ के ऑप एड पेज पर प्रकाशित किए गए लेख में जो सवाल उठाए गए उनमें लिखा गया है कि निरंजन ही एक मात्र अधिकारी हैं, जिनका निधन ऑपरेशन के दौरान हुआ है। टेलीग्राफ ने लिखा है कि निरंजन बॉम्ब स्क्वायड टीम के प्रमुख थे, लेकिन जब वो एक्सप्लोसिव्स को नष्ट करने के लिए गए तो उन्होंने वह यूनिफॉर्म नहीं पहनी थी, जो ब्लास्ट के दौरान उनकी रक्षा करती। लेख में लिखा गया है कि निरंजन आतंकियों के 'सरल फंदे' में फंस गए। इतना ही नहीं टेलीग्राफ ने यह भी लिखा कि निरंजन ने आतंकी के मृत शरीर को हटाने के लिए किसी भी तरह के विशेष उपकरण, जैसे का रिमोट का सहारा नहीं लिया।
टेलीग्राफ ने लिखा कि अपने इस मूर्खतापूर्ण अथवा वाहवाही के लिए किए गए इस कृत्य के कारण निरंजन ने अपनी जान तो गंवाई ही साथ ही साथ पांच अन्य जवान भी गंभीर रूप से उस विस्फोट में घायल हो गए। इस लेख में लिखा गया है कि निरंजन के निधन के बाद सभी उसे सम्मान दे रहे हैं लेकिन यह कोई नहीं पूछ रहा कि 'क्या निरंजन, अपने निधन के बाद सम्मान के लायक हैं?' हालांकि टेलीग्राफ के इस लेख का खासा विरोध हो रहा है।
फेसबुक पर Indian Army Fans नाम से मौजूद पेज ने टेलीग्राफ के लेख की भर्त्सना करते हुए लिखा है कि 'टेलीग्राफ अखबार की संपादकीय टीम निर्लज्ज है।' पेज की पोस्ट पर लिखा कि शहीदों की चिता की चिंगारी ठंडी भी नहीं पड़ी है और उन्हें अपमानित किया जा रहा है। उन शहीदों के परिवारों के बारे में सोचिए जिनके हाथों में यह अखबार होगा, जो उनसे अपराधी की तरह व्यवहार करने की बात कर रहा है। आपको बता दें कि निरंजन की शहादत के बाद उनकी बहन ने कहा था कि वे अपने भाई को अर्जुन के रूप में देखती हैं, जिसने कर्मभूमि के लिए अपनी जान दे दी।