Mahashivratri 2026: 300 साल बाद बना दुर्लभ ग्रह संयोग, इस खास समय करें पूजा नहीं तो चूक जाएंगे लाभ

Edited By Updated: 12 Feb, 2026 09:54 PM

mahashivratri 15 february 2026

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हर वर्ष महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिव्य रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।

नेशनल डेस्क: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हर वर्ष महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिव्य रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी (रविवार) को मनाई जाएगी। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग का अभिषेक कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

300 साल बाद बन रहा दुर्लभ ग्रह संयोग?

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं। सूर्य, बुध और शुक्र की युति से त्रिग्रही योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही श्रवण नक्षत्र, व्यतिपात योग, वरियान योग, ध्रुव योग और राजयोग जैसे शुभ संयोग भी बताए जा रहे हैं। ज्योतिष मान्यता है कि ऐसे संयोगों में साधना, ध्यान और मंत्र जाप का प्रभाव अधिक होता है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

महाशिवरात्रि की पूजा: चार प्रहर का महत्व

महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग की विशेष पूजा और अभिषेक का विधान है। भक्त पूरी रात भजन-कीर्तन और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हैं। मान्यता है कि इस रात की उपासना से मोक्ष, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।

शुभ मुहूर्त (दिल्ली/उत्तर भारत के अनुसार – द्रिक पंचांग आधारित)

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी शाम 5:04 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी शाम 5:34 बजे

निशीथ काल (सबसे महत्वपूर्ण समय)

15 फरवरी रात 12:09 AM से 1:01 AM (16 फरवरी तक) यह लगभग 51 मिनट का विशेष काल है, जिसे पूजा और अभिषेक के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

चार प्रहर पूजा समय

  • पहला प्रहर: शाम 6:11 PM – 9:23 PM
  • दूसरा प्रहर: रात 9:23 PM – 12:35 AM
  • तीसरा प्रहर: रात 12:35 AM – 3:47 AM
  • चौथा प्रहर: सुबह 3:47 AM – 6:59 AM

व्रत पारण समय

16 फरवरी सुबह 6:59 AM से दोपहर 3:24 PM तक

पूजा विधि और आवश्यक सामग्री

  • शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा और फल अर्पित करें।
  • ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
  • यदि पूरी रात जागरण संभव न हो, तो निशीथ काल में पूजा अवश्य करें।

क्यों खास मानी जा रही है यह शिवरात्रि?

आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार, यह रात्रि आत्मचिंतन, साधना और सकारात्मक बदलाव का अवसर देती है। भक्त इसे कर्म बंधनों से मुक्ति और शिव कृपा प्राप्त करने का विशेष समय मानते हैं।
 

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