TMC में बड़ी टूट... ममता को छोड़... 20 सांसद बनाएंगे अलग गुट, NDA को दे सकते हैं समर्थन

Edited By Updated: 08 Jun, 2026 06:08 PM

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विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस में विद्रोह की लपटें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं क्योंकि 58 विधायकों की बगावत के बाद अब टीएमसी के संसदीय दल तक भी ये विरोध की आग पहुंच गई है।

नेशनल डेस्क: विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस में विद्रोह की लपटें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं क्योंकि 58 विधायकों की बगावत के बाद अब टीएमसी के संसदीय दल तक भी ये विरोध की आग पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस में टूट की अटकलों पर सोमवार को पार्टी की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने मुहर लगा दी है। सांसद काकोली घोष ने कहा है कि मेरे साथ टीएमसी के करीब 20 सांसदों ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि ये बैठक असंतुष्ट सांसदों के एक समूह ने बंद कमरे में बैठक की, जिसने पार्टी में असंतोष के स्तर को उजागर किया है।

करीब 20 सांसद इस अनौपचारिक बैठक की 
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, रविवार देर रात दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर करीब 20 सांसद इस अनौपचारिक बैठक में शामिल हुए। इस घटनाक्रम ने उन अटकलों को हवा दे दी है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक दल को तोड़ने वाली यह बगावत अब पार्टी के संसदीय दल के भीतर भी आकार ले सकती है। बैठक के बारे में जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, सांसदों ने भविष्य की संभावित रणनीतियों पर चर्चा की और पार्टी की मौजूदा संसदीय नेतृत्व संरचना पर अपनी नाराजगी जताई।

मैं तृणमूल के साथ रहूंगा
हालांकि, तृणमूल के वरिष्ठ सांसद सौगत राय ने बड़े पैमाने पर पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ''मैंने सुना है कि कुछ सांसदों ने कल रात अलग बैठक की। बैठक में क्या हुआ, यह वही बता सकते हैं। उन लोगों ने मुझसे कोई संपर्क नहीं किया।'' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा तृणमूल सांसदों से संपर्क किए जाने की खबरों पर राय ने कहा कि उनसे भी संपर्क किया गया था, लेकिन उन्होंने पेशकश को ठुकरा दिया। चार बार के सांसद राय (78) ने कहा, ''मैंने उनसे दो टूक कह दिया कि मैं तृणमूल के साथ रहूंगा। इस उम्र में खेमा बदलना मेरे लिए संभव नहीं।

असंतुष्ट सांसदों का दावा चुनावी हार को स्वीकार नहीं रही है पार्टी 
हालांकि, बैठक में कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया गया, लेकिन इस तरह के विकल्पों पर विचार-विमर्श करना ही तृणमूल के सांसदों के एक वर्ग में गहरे असंतोष को उजागर करता है। बैठक के बारे में जानकारी रखने वाले तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने कहा, ''बैठक मूलत: भविष्य की रणनीतियों पर केंद्रित थी। कई सांसदों ने चिंता जताई कि नेतृत्व पार्टी की चुनावी हार के कारणों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है।'' सोमवार को सोशल मीडिया पर बैठक की एक तस्वीर सामने आई, जिसमें तृणमूल के कई लोकसभा सदस्य एक मेज के इर्द-गिर्द बैठे दिख रहे हैं।

लोगों का दावा 20 सांसद बैठक में रहे शामिल
हालांकि इस तस्वीर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका। सूत्रों का दावा है कि तस्वीर में दिख रहे लोगों से कहीं अधिक, करीब 20 सांसद इस बैठक में शामिल थे। बैठक के दौरान उस वक्त माहौल गर्म हो गया, जब एक सांसद ने बिना बताए बैठक की तस्वीरें खींच लीं। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शामिल कुछ सांसदों ने बिना सहमति के तस्वीरें लेने पर आपत्ति जताई और इसे लेकर वहां मौजूद लोगों के बीच थोड़ी नोकझोंक भी हुई। 

अभिषेक बनर्जी 'इंडिया' की बैठक में रहे शामिल 
बाद में ये तस्वीरें राजनीतिक गलियारों में फैल गईं, जिससे बगावत के दायरे व गंभीरता को लेकर अटकलों को और हवा मिल गई। सूत्रों ने बताया कि रविवार की बैठक में शामिल कुछ सांसद सोमवार को भी आपस में संपर्क में रहे और दिल्ली में एक केंद्रीय सरकारी कार्यालय में भी चर्चा की। इस बैठक के समय ने इसकी राजनीतिक अहमियत और बढ़ा दी है। यह बैठक ऐसे वक्त हुई, जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में मौजूद थे।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रिताब्रता किए गए हैं नियुक्त 
तृणमूल कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इसी मंच के जरिए पश्चिम बंगाल में जारी उथल-पुथल के बावजूद संगठनात्मक मजबूती का संदेश देने की कोशिश कर रहा था। ये घटनाक्रम विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद तृणमूल कांग्रेस विधायक दल में बगावत के कुछ ही दिनों बाद सामने आए हैं। पार्टी के 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व की लाइन से अलग रुख अपनाते हुए विपक्ष के नेता पद के लिए रिताब्रता बनर्जी का समर्थन किया था और पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय को खारिज कर दिया था। इस विद्रोह की परिणति विधानसभा अध्यक्ष द्वारा रिताब्रता को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने के साथ हुई।

राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय ने दिया इस्तीफा 
इसने विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद संगठन के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया और अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों पर नेतृत्व के अधिकार पर भी सवाल खड़े कर दिए। राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कहा कि सांसदों की यह बैठक इस बात का पहला स्पष्ट संकेत है कि असंतोष अब केवल राज्य विधानसभा तक सीमित नहीं रह गया है। पार्टी की बेचैनी को और बढ़ाते हुए राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस और संसद की सदस्यता, दोनों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने शासन और संगठन में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के खिलाफ जनता का गुस्सा खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।

हालांकि, हालांकि, राय के इस्तीफे को औपचारिक रूप से रविवार की बैठक से नहीं जोड़ा गया था, लेकिन उस बैठक में उनकी मौजूदगी और उसके बाद उनके इस्तीफे ने उन अटकलों को तेज कर दिया है कि असंतुष्ट खेमा किस दिशा में आगे बढ़ सकता है। 
 

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