Edited By Radhika,Updated: 13 Mar, 2026 01:12 PM

देश के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पीएम मोदी ने आज यानि 13 मार्च को असम में डिजिटल बटन दबाकर पीएम-किसान सम्मान निधि की बहुप्रतीक्षित 22वीं किस्त जारी करेंगे। शाम 5 बजे होते ही DBT के माध्यम से देश के 9 करोड़ से अधिक लाभार्थी किसानों...
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को राज्य के अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों के लिए पांच नए सांस्कृतिक एवं विकास बोर्डों के गठन का ऐलान किया है। सीएम का यह निर्णय राज्य की सामाजिक और राजनीतिक दिशा में काफी अहम माना जा रहा है।
किन समुदायों को मिला प्रतिनिधित्व?
ममता सरकार ने जिन पांच समुदायों के लिए इन विशेष बोर्डों के गठन का फैसला किया है, उनमें शामिल हैं:
- अनुसूचित जनजाति (ST): मुंडा और कोरा समुदाय।
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): कुंभकार और सद्गोप समुदाय।
- अनुसूचित जाति (SC): डोम समुदाय।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन समुदायों को बधाई देते हुए कहा कि ये वर्ग बंगाल की जीवंत संस्कृति का अभिन्न अंग हैं।
बोर्ड गठन का मकसद
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि इन बोर्डों का प्राथमिक लक्ष्य समुदायों की विशिष्ट भाषाओं और परंपराओं का संरक्षण करना है। इसके साथ ही, ये बोर्ड विभिन्न क्षेत्रों में काम करेंगे, जिनमें न्निलिखित शामिल हैं-
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शिक्षा और स्वास्थ्य: समुदायों के लिए बेहतर शैक्षणिक और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करना।
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रोजगार: युवाओं के लिए नौकरी के नए अवसर पैदा करना।
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सामाजिक-आर्थिक विकास: उनके प्रथागत अधिकारों की रक्षा करना और सर्वांगीण प्रगति लाना।
मुख्यमंत्री ने अपने प्रसिद्ध नारे का जिक्र करते हुए कहा, "हमारी 'मां, माटी, मानुष' के प्रति प्रतिबद्धता का अर्थ है कि कोई भी समुदाय पीछे न छूटे।"

विपक्ष का पलटवार
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घोषणा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बंगाल दौरे के दौरान हुए प्रोटोकॉल विवाद के बीच अपनी छवि सुधारने की एक कोशिश हो सकती है। वहीं, राज्य BJP ने इस फैसले को 'चुनावी स्टंट' करार दिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ममता सरकार मतदाताओं को लुभाने के लिए यह 'छलावा' कर रही है।