सांसद सतनाम सिंह संधू ने की शाहपुर कंडी बांध से रावी नदी के पानी को पंजाब की नहर प्रणाली से जोड़ने की मांग

Edited By Updated: 06 Aug, 2026 06:22 PM

mp satnam singh sandhu raised the issue of punjab water crisis in parliament

राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने पंजाब में गहराते जल संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से राज्य की पुरानी नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण तथा प्रमुख जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए विशेष कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर में लगातार...

नेशनल डेस्कः राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने पंजाब में गहराते जल संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से राज्य की पुरानी नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण तथा प्रमुख जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए विशेष कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर में लगातार गिरावट और पुरानी नहरों की घटती जल धारण क्षमता के कारण पंजाब गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है।

संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में यह मुद्दा उठाते हुए सांसद संधू ने कहा कि पंजाब देश का अन्न भंडार है और हरित क्रांति के बाद से राज्य के किसानों ने देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में ऐतिहासिक योगदान दिया है।
उन्होंने कहा, "आज पंजाब तेजी से गिरते भूजल-स्तर और गंभीर जल संकट जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। राज्य की अधिकांश नहरें पुरानी हो चुकी हैं। गाद जमने, संरचनात्मक क्षति और रिसाव के कारण उनकी जल धारण क्षमता काफी कम हो गई है। अधिकांश नहरें आज भी पारंपरिक प्रणाली पर संचालित हैं। इसके साथ ही रूपनगर (रोपड़), हरिके, कांजली, केशोपुर, मियानी, नंगल, झज्जर और बडोली सहित पंजाब के सभी प्रमुख वेटलैंड्स एवं जलाशयों की नियमित सफाई, डिसिल्टिंग, पुनर्जीवन और जल धारण क्षमता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।"

सांसद सतनाम सिंह संधू ने आगे कहा कि पंजाब में नहर सिंचाई के तहत आने वाला क्षेत्र कम हो गया है और इस दायरे को बढ़ाना समय की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, “मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि वह पंजाब के नहर बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए विशेष उपाय करे। शाहपुर कंडी बांध से मिलने वाले रावी नदी के पानी को पंजाब की नहर प्रणाली से जोड़ा जाना चाहिए और राज्य की सभी प्रमुख नहरों की मरम्मत, आधुनिकीकरण, मज़बूती, पुनर्विकास और संचालन-रखरखाव के लिए विशेष केंद्रीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए।”

सांसद संधू ने कहा कि पंजाब के प्रमुख जलाशयों जैसे रूपनगर (रोपड़), हरिके, कांजली, केशोपुर, मियानी, नंगल, झज्जर और बडोलीको डीसिल्ट करने, पुनर्जीवित करने और उनकी जल धारण क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष राष्ट्रीय परियोजना शुरू की चाहिए। उन्होंने कहा, "इसके अलावा, पंजाब में नहरों से सिंचाई का दायरा बढ़ाने और नहरों से सिंचाई वाले इलाके को बढ़ाने के लिए एक खास योजना बनाई जानी चाहिए, ताकि राज्य की आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।"

सांसद संधू ने कहा कि पंजाब में भूजल का अत्यधिक उपयोग और नहरों की घटती जल धारण क्षमता राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड के 2025 के नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के ज़्यादातर ज़िलों में भूजल का संकट गंभीर स्थिति में पहुँच गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पंजाब के 153 भूजल आकलन ब्लॉकों में से 111 (72.55%) अब 'अत्यधिक दोहन' वाली श्रेणी में हैं। जबकि 25 अन्य ब्लॉक 'गंभीर' या 'अर्ध-गंभीर' श्रेणी में हैं, राज्य के केवल 17 ब्लॉक ही 'सुरक्षित' श्रेणी में बचे हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में प्रतिवर्ष 26.27 बिलियन क्यूबिक मीटर भूजल निकला जा है, जो भूजल निकालने की सुरक्षित वार्षिक सीमा (16.80 बिलियन क्यूबिक मीटर) से 56.36% अधिक है यानि पंजाब हर 100 लीटर भूजल के बदले 156 लीटर भूजल निकाल रहा है।

सांसद संधू ने कहा कि पिछले 27 वर्षों से भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, जो राज्य की कृषि, पीने के पानी की आपूर्ति और दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि वर्षों से नहरों की जल वहन और जल धारण क्षमता भी कम होती गई है। राज्य की ज़्यादातर नहरें पुरानी हैं,गाद जमने, संरचनात्मक क्षति और रिसाव के कारण अधिकांश नहरों की क्षमता प्रभावित हुई है। परिणामस्वरूप आज राज्य की कुल सिंचाई आवश्यकताओं का केवल 24 प्रतिशत हिस्सा नहरों से पूरा हो रहा है, जबकि 76 प्रतिशत सिंचाई लगभग 13.91 लाख बिजली चालित ट्यूबवेलों पर निर्भर है। नहरों के कम उपयोग के कारण भूजल पर बढ़ती निर्भरता भूजल स्तर में लगातार गिरावट को और तेज कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से पुनः आग्रह किया कि पंजाब की नहर प्रणाली के व्यापक आधुनिकीकरण, प्रमुख जलाशयों के पुनर्जीवन, डिसिल्टिंग और जल धारण क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष राष्ट्रीय परियोजना शुरू की जाए, ताकि राज्य की भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। 

 

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