Edited By Mansa Devi,Updated: 04 Jun, 2025 05:25 PM

ईद-उल अज़हा से पहले मुस्लिम धर्म गुरुओं ने समुदाय से बकरीद पर खुले में या सड़कों पर जानवरों की कुर्बानी नहीं करने और इनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर नहीं डालने की अपील की है। प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एएम) के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने...
नेशनल डेस्क: ईद-उल अज़हा से पहले मुस्लिम धर्म गुरुओं ने समुदाय से बकरीद पर खुले में या सड़कों पर जानवरों की कुर्बानी नहीं करने और इनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर नहीं डालने की अपील की है। प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एएम) के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने एक बयान में कहा कि मुसलमान कुर्बानी करते समय सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन करें और प्रतिबंधित जानवरों की कर्बानी से बचें। मुसलमानों को ईद-उल-अज़हा के मौके पर साफ़-सफ़ाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह देते हुए मदनी ने कहा “जानवरों के अवशेषों को सड़कों, गलियों और नालियों में न फेंकें, बल्कि उन्हे इस तरह से दफ़न किया जाए कि बदबू न फैले। हर मुमकिन कोशिश की जाए कि हमारे किसी कार्य से किसी को तकलीफ न पहुंचे।” उन्होंने समुदाय से कहा कि वे कुर्बानी की तस्वीरें-वीडियो सोशल मीडिया आदि पर साझा करने से बचें। वहीं, दिल्ली स्थित जामा मस्जिद के नायब शाही इमाम सैयद शाबान बुखारी ने एक बयान में लोगों को त्योहार के दौरान अपने इलाकों में सफाई सुनिश्चित करने की सलाह दी।
उन्होंने लोगों से कहा कि वह सड़कों या खुले स्थानों पर कुर्बानी करने से बचें। इमाम ने कहा, "जिस तरह होली और दिवाली जैसे त्यौहार पूरे भारत में सम्मान के साथ मनाए जाते हैं, उसी तरह ईद-उल-अजहा को भी सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया जाना चाहिए।" ईद-उल-अज़हा इस बार सात जून को मनाई जाएगी। इस त्योहार को ईद-उल-ज़ुहा और बकरीद के नाम से भी जाना जाता है। बुखारी ने कहा, "सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी कार्य से साथी नागरिकों की भावनाओं या आस्थाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। इसलिए, कुर्बानी केवल निजी परिसर जैसे घरों या निर्धारित बाड़ों में ही की जानी चाहिए - सड़कों या खुले स्थानों पर नहीं।" उन्होंने भी लोगों से कुर्बानी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने से बचने का अनुरोध किया।