Edited By Pardeep,Updated: 17 Feb, 2026 09:24 PM

भारत में शादी को पहले जीवन का सबसे जरूरी पड़ाव माना जाता था। कम उम्र में ही लड़के-लड़कियों की शादी की बात शुरू हो जाती थी। लेकिन अब समय बदल चुका है।
नेशनल डेस्कः भारत में शादी को पहले जीवन का सबसे जरूरी पड़ाव माना जाता था। कम उम्र में ही लड़के-लड़कियों की शादी की बात शुरू हो जाती थी। लेकिन अब समय बदल चुका है। आज के युवा पहले अपनी पढ़ाई, करियर और आर्थिक मजबूती पर ध्यान दे रहे हैं, उसके बाद ही शादी के बारे में सोचते हैं।
एक नई रिपोर्ट के मुताबिक भारतीयों की शादी को लेकर सोच, उम्र और प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं।
27 से बढ़कर 29 साल हुई शादी की औसत उम्र
मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म Jeevansathi की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि 10 साल पहले भारतीय युवाओं की शादी की औसत उम्र 27 साल थी। लेकिन अब यह औसत बढ़कर 29 साल हो गई है। यानी अब ज्यादातर युवा 29 साल की उम्र के बाद ही शादी के बारे में गंभीरता से सोचते हैं।
इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
अब शादी जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं, बल्कि सोच-समझकर उठाया जाने वाला कदम बन गई है।
29 की उम्र में शुरू हो रही है पार्टनर की तलाश
रिपोर्ट के अनुसार, अब आधे से ज्यादा सिंगल लोग 29 साल की उम्र में अपने लिए पार्टनर सर्च करना शुरू करते हैं। पहले जहां 18–22 साल की उम्र में ही परिवार शादी की बात करने लगते थे, वहीं अब युवा खुद अपने करियर और जीवन के लक्ष्य तय करने के बाद ही शादी पर विचार करते हैं। यह बदलाव बताता है कि नई पीढ़ी अपने फैसले खुद लेना चाहती है और जीवनसाथी चुनने में भी समय लेना पसंद करती है।
दूसरी शादी (रीमैरिज) के मामलों में 43% की बढ़ोतरी
रिपोर्ट की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दूसरी शादी के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। साल 2016 में करीब 11% लोग दूसरी शादी की तलाश में थे। साल 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 16% हो गया। यानी रीमैरिज के मामलों में करीब 43% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह दिखाता है कि अब समाज में दूसरी शादी को पहले जैसा टैबू नहीं माना जा रहा है।
टूटा पुराना मिथक: तलाक के बाद भी मिल रहा है साथ
पहले अगर किसी की शादी टूट जाती थी, तो दोबारा शादी करना मुश्किल माना जाता था। समाज में इसे लेकर कई तरह की बातें होती थीं। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। हर छह सफल शादियों में से एक दूसरी शादी है। तलाकशुदा प्रोफाइल में दिलचस्पी दिखाने वालों में 15% ऐसे लोग हैं जिन्होंने पहले कभी शादी ही नहीं की। इससे साफ है कि अब लोग किसी के अतीत की बजाय उसके व्यक्तित्व और समझ को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
अब 36 नहीं, सिर्फ एक ही गुण की तलाश
पहले शादी में जाति, उम्र, सैलरी और परिवार की पृष्ठभूमि को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती थी। लेकिन अब नई पीढ़ी के लिए सबसे जरूरी चीज है — कम्पैटिबिलिटी (आपसी समझ और स्वभाव)। करीब 90% लोगों का कहना है कि उनके लिए सही स्वभाव वाला और समझदार पार्टनर मिलना, उम्र या कमाई से ज्यादा जरूरी है। 2016 में 91% लोग शादी में जाति को जरूरी मानते थे। 2025 तक यह संख्या घटकर 54% रह गई है। यानी जाति का महत्व कम हो रहा है और आपसी समझ सबसे ऊपर आ गई है।
बदलते समाज की नई तस्वीर
इन आंकड़ों से साफ है कि भारतीय समाज में शादी को लेकर बड़ा बदलाव आ रहा है।
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शादी की उम्र बढ़ रही है।
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लोग आर्थिक और मानसिक रूप से तैयार होकर शादी कर रहे हैं।
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दूसरी शादी को स्वीकार किया जा रहा है।
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जाति की जगह अब कम्पैटिबिलिटी को प्राथमिकता मिल रही है।