Edited By Pardeep,Updated: 12 Feb, 2026 10:09 PM

भारत में पिछले कुछ सालों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। फरवरी, जिसे पहले हल्की सर्दी और सुहानी धूप का महीना माना जाता था, अब गर्मी की शुरुआत जैसा महसूस होने लगा है। इस साल उत्तरी भारत में फरवरी के दौरान तापमान कई जगह सामान्य से काफी ज्यादा...
नेशनल डेस्कः भारत में पिछले कुछ सालों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। फरवरी, जिसे पहले हल्की सर्दी और सुहानी धूप का महीना माना जाता था, अब गर्मी की शुरुआत जैसा महसूस होने लगा है। इस साल उत्तरी भारत में फरवरी के दौरान तापमान कई जगह सामान्य से काफी ज्यादा दर्ज किया गया। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या मार्च से पहले ही गर्मी पूरी ताकत के साथ लौट आएगी?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक साल की बात नहीं, बल्कि बदलते जलवायु पैटर्न का संकेत है।
रिकॉर्ड तोड़ तापमान ने बढ़ाई चिंता
दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फरवरी 2026 के शुरुआती और मध्य हफ्तों में अधिकतम तापमान सामान्य से 5 से 8 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया। कई जगहों पर तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। राजस्थान के कुछ जिलों में पारा 32 से 34 डिग्री तक पहुंच गया। दिल्ली में औसत अधिकतम तापमान लगातार सामान्य से ऊपर बना रहा। आमतौर पर ऐसा तापमान मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में देखने को मिलता है। इसलिए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि मौसम अब पुराने पैटर्न के अनुसार नहीं चल रहा।
फरवरी में गर्मी बढ़ने की वजह क्या है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्व अपर महानिदेशक डॉ. आनंद शर्मा के अनुसार, इस बार तापमान बढ़ना कोई अलग घटना नहीं है। इसके पीछे कई कारण मिलकर काम कर रहे हैं।
1. ग्लोबल वार्मिंग का असर
धरती का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है। IPCC की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया में गर्म दिनों और गर्म रातों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
भारत में शहरी इलाकों में “हीट आइलैंड इफेक्ट” तापमान बढ़ा देता है। कंक्रीट की इमारतें गर्मी को ज्यादा देर तक रोकती हैं। पेड़ों की कमी और वाहनों का धुआं तापमान बढ़ाने में योगदान देता है। इस वजह से शहरों में गर्मी का असर और ज्यादा महसूस होता है।
2. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) कमजोर रहा
फरवरी में आमतौर पर कई पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहते हैं, जो बारिश और बादल लाते हैं। इससे तापमान नियंत्रित रहता है। लेकिन इस साल पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहे, पर्याप्त बारिश नहीं हुई, आसमान साफ रहा और सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ीं। नतीजा यह हुआ कि सर्दी जल्दी खत्म हो गई और गर्मी का असर जल्दी दिखने लगा।
3. अल नीनो जैसी महासागरीय घटनाएं
अल नीनो के दौरान समुद्र के तापमान में बदलाव आता है, जिसका असर भारत के मौसम पर पड़ता है।
इन सभी कारणों के मिलेजुले असर से इस बार फरवरी ज्यादा गर्म रही।
क्या मार्च में पड़ेगी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी?
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर फरवरी में ही तापमान इतना बढ़ गया है, तो मार्च और अप्रैल चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
IMD के शुरुआती संकेत बताते हैं मार्च में हीटवेव सामान्य से पहले शुरू हो सकती है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में मार्च के मध्य तक तापमान 35 से 38 डिग्री तक पहुंच सकता है।अप्रैल और मई में गर्मी का चरम पहले से ज्यादा कठोर हो सकता है। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो 2026 भारत के सबसे गर्म वर्षों में से एक बन सकता है।
किसानों और आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
जल्दी शुरू हुई गर्मी सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि कई सामाजिक और आर्थिक समस्याएं भी पैदा कर सकती है।
1. फसलों पर असर
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गेहूं, चना और सरसों जैसी रबी फसलें तापमान के प्रति संवेदनशील होती हैं।
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ज्यादा गर्मी से “हीट स्ट्रेस” होता है।
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गेहूं की पैदावार में कमी आ सकती है।
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किसानों को ज्यादा सिंचाई करनी पड़ सकती है।
2. स्वास्थ्य पर असर
3. बिजली और पानी की मांग बढ़ेगी