नई सरकार बनने के अगले ही दिन मणिपुर में हिंसा, कुकी समुदाय की पुलिस से झड़प, स्थिति अभी भी तनावपूर्ण

Edited By Updated: 05 Feb, 2026 10:59 PM

violence erupted in manipur the day after the new government was formed

मणिपुर में नई सरकार के गठन के ठीक एक दिन बाद ही हालात फिर से बिगड़ते नजर आए। गुरुवार को कुकी आदिवासी बहुल चुराचांदपुर जिले में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। कुकी समुदाय के संगठनों ने पहले से बंद का आह्वान किया था, लेकिन प्रदर्शन के दौरान...

नेशनल डेस्कः मणिपुर में नई सरकार के गठन के ठीक एक दिन बाद ही हालात फिर से बिगड़ते नजर आए। गुरुवार को कुकी आदिवासी बहुल चुराचांदपुर जिले में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। कुकी समुदाय के संगठनों ने पहले से बंद का आह्वान किया था, लेकिन प्रदर्शन के दौरान स्थिति हिंसक हो गई और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाबलों से भिड़ंत हो गई।

जब पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और सड़क से हटाने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और कई जगह आगजनी भी की। इससे इलाके में तनाव बढ़ गया और पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।

सरकार गठन से पहले ही दी गई थी चेतावनी

नई सरकार बनने से पहले ही कई कुकी संगठनों ने अपने समुदाय के विधायकों को चेतावनी दी थी कि वे सरकार गठन की प्रक्रिया में हिस्सा न लें। संगठनों का कहना था कि यह समुदाय के हितों के खिलाफ होगा। सरकार बनने के बाद, चुराचांदपुर जिले के प्रमुख आदिवासी संगठन जॉइंट फोरम ऑफ सेवन ने शुक्रवार सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक कुकी बहुल इलाकों में पूर्ण बंद का आह्वान किया। संगठन ने एक बार फिर अलग कुकी प्रशासन की मांग दोहराई और समुदाय के लोगों से गांवों में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की अपील की।

संगठन ने यह भी साफ किया कि अगर कोई कुकी विधायक उनकी बात को अनदेखा कर सरकार में शामिल होता है, तो वह अपने निजी फैसले पर ऐसा करेगा। ऐसे किसी भी फैसले के परिणामों के लिए संगठन जिम्मेदार नहीं होगा। कुछ कुकी उग्रवादी समूहों ने भी विधायकों से सरकार गठन से दूर रहने की चेतावनी दी थी।

सरकार में शामिल होना विश्वासघात माना जाएगा

बुधवार रात को भी विरोध प्रदर्शन हुए थे। कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग इलाके में लोगों ने टायर जलाकर और सड़क पर बांस रखकर विरोध जताया। यह प्रदर्शन नेमचा किपगेन के डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के खिलाफ था। कुकी लिबरेशन आर्मी ने बयान जारी कर कहा कि यह उनकी आखिरी और साफ चेतावनी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी कुकी जनप्रतिनिधि सरकार गठन में शामिल होता है, तो इसे पूरे समुदाय के साथ विश्वासघात माना जाएगा।

हिंसा और संपत्ति पर हमले की आशंका

बयान में यह भी कहा गया कि अगर इस फैसले के कारण कोई हिंसक घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी उन कुकी जनप्रतिनिधियों पर होगी जिन्होंने सरकार में शामिल होने का फैसला किया। इस बीच, हमार जनजाति की संस्था हमार इनपुई ने दावा किया कि उन्हें पुख्ता जानकारी मिली है कि कुछ लोग जानबूझकर हिंसा भड़काने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि ऐसे लोग निर्वाचित कुकी विधायकों की संपत्तियों को निशाना बना सकते हैं।

स्थिति अभी भी तनावपूर्ण

फिलहाल चुराचांदपुर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और केंद्रीय बल लगातार गश्त कर रहे हैं ताकि हालात और न बिगड़ें। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन कुकी संगठनों का विरोध अभी भी जारी है।

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