Edited By Parveen Kumar,Updated: 18 Feb, 2026 06:19 PM

केरल सरकार ने 'सी-सेक्शन' के जरिये जन्म के बाद एक नवजात शिशु की मौत होने के मामले में यहां के एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत एक चिकित्सक को बुधवार को निलंबित कर दिया। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने जांच लंबित रहने तक परामर्श चिकित्सक बिंदु...
नेशनल डेस्क : केरल सरकार ने 'सी-सेक्शन' के जरिये जन्म के बाद एक नवजात शिशु की मौत होने के मामले में यहां के एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत एक चिकित्सक को बुधवार को निलंबित कर दिया। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने जांच लंबित रहने तक परामर्श चिकित्सक बिंदु सुंदर को निलंबित कर दिया, जो निकट के नेदुमंगद स्थित जिला अस्पताल में स्त्री रोग विभाग में सेवा दे रही थीं। एक सरकारी आदेश के अनुसार, मंगलवार को नवजात शिशु की मौत होने के संबंध में चिकित्सकीय लापरवाही और रिश्वतखोरी के आरोपों के मद्देनजर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
आदेश में कहा गया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और मामले की विस्तृत जांच की जाएगी। इससे पहले दिन में, डॉ सुंदर को नेदुमंगद जिला अस्पताल से स्थानांतरित करने और नवजात की मौत की गहन जांच करने के लिए चिकित्सकों की एक विशेषज्ञ समिति के गठन का आदेश दिया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मंत्री के निर्देश पर जांच के लिए एसएटी अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम गठित की गई है।
मंगलवार शाम से ही नेदुमंगद अस्पताल में विभिन्न राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन किये जा रहे हैं, क्योंकि 'सी-सेक्शन' प्रक्रिया के जरिये जन्म के बाद नवजात की मौत हो गई थी। शिशु के परिवार ने आरोप लगाया कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण उसकी मौत हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर ने प्रसव कराने से पहले रिश्वत ली थी। इससे पहले दिन में, केरल गवर्नमेंट मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (केजीएमओए) ने नेदुमंगद जिला अस्पताल में चिकित्सकों पर कथित तौर पर हमला करने और अशांति फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। एसोसिएशन ने इस घटना को ''लोकतांत्रिक समाज में अस्वीकार्य'' बताते हुए तिरूवनंतपुरम जिले में 18 फरवरी को विरोध दिवस मनाने का आह्वान किया था।
सरकारी अस्पताल में नवजात की मौत होने के मामले में, मंगलवार को पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 194 के तहत एक मामला दर्ज किया था। प्रसूता के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें बताया गया था कि अगर दोपहर तक बच्चे का जन्म नहीं हुआ तो 'सीजेरियन ऑपरेशन' किया जाएगा, लेकिन उन्होंने दावा किया कि प्रक्रिया में देरी की गई। पुलिस के अनुसार, कांग्रेस, भाजपा और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को अस्पताल के बाहर आरोपी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था।