हार्ट अटैक से मौत, नहीं दिया स्ट्रेचर, कंधों पर उठाना पड़ा शव... सामने आई अस्पताल की बड़ी लापरवाही

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 07:16 PM

humanity shamed at mgm hospital in warangal

तेलंगाना के वारंगल शहर में स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। खम्मम जिले के निवासी कांता राव की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, लेकिन...

नेशनल डेस्क : तेलंगाना के वारंगल शहर में स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। खम्मम जिले के निवासी कांता राव की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने परिजनों के जख्म और गहरे कर दिए।

हार्ट अटैक से मौत, फिर शुरू हुई असली पीड़ा

जानकारी के मुताबिक कांता राव को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार पहले ही सदमे में था, लेकिन जब शव को मॉर्चुरी से एंबुलेंस तक ले जाने की बात आई तो उन्हें अस्पताल प्रशासन से किसी तरह की मदद नहीं मिली।

परिजनों का आरोप है कि स्ट्रेचर उपलब्ध कराने से मना कर दिया गया। स्टाफ ने कथित तौर पर यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह उनका काम नहीं है। मजबूरी में परिवार के लोगों को अपने प्रियजन का शव खुद कंधों पर उठाकर अस्पताल परिसर से बाहर तक ले जाना पड़ा।

गलियारों में उठता रहा शव, कोई आगे नहीं आया

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शव को अस्पताल के अंदरूनी गलियारों से होते हुए पार्किंग तक ले जाया गया। इस दौरान न तो कोई कर्मचारी सहायता के लिए आगे आया और न ही किसी अधिकारी ने हस्तक्षेप किया। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की स्थिति ने मौजूद लोगों को भी स्तब्ध कर दिया।

योजनाएं बनाम जमीनी हकीकत

एक ओर सरकारें बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का दावा करती हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं उन दावों की सच्चाई सामने रख देती हैं। सरकारी अस्पतालों में बुनियादी संसाधनों की कमी और स्टाफ के असंवेदनशील व्यवहार की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं।

बुनियादी सुविधाओं पर फिर सवाल

तेलंगाना के कई जिला और सरकारी अस्पतालों में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और पर्याप्त स्टाफ की कमी की बातें अक्सर उठती रही हैं। लेकिन एक बड़े मेडिकल संस्थान में मृतक के शव के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल अमानवीय है, बल्कि चिकित्सा नैतिकता के भी विपरीत माना जा रहा है।

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