Edited By Rohini Oberoi,Updated: 21 Jan, 2026 10:31 AM

देश के कई राज्यों में निपाह वायरस (Nipah Virus) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। पश्चिम बंगाल और झारखंड में संक्रमण फैलने के बाद अब तमिलनाडु सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री मा. सुब्रमण्यन ने...
Nipah Virus High Alert: देश के कई राज्यों में निपाह वायरस (Nipah Virus) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। पश्चिम बंगाल और झारखंड में संक्रमण फैलने के बाद अब तमिलनाडु सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री मा. सुब्रमण्यन ने सभी सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं।
एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) पर विशेष नजर
तमिलनाडु स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि वे AES (दिमागी बुखार) के लक्षणों वाले मरीजों की कड़ी निगरानी करें। निपाह एक बेहद घातक वायरस है जिसकी मृत्यु दर (Death Rate) 75% से 100% तक हो सकती है। यानी संक्रमित होने पर बचने की संभावना बहुत कम होती है इसलिए समय पर पहचान ही एकमात्र बचाव है।

हाई अलर्ट के दौरान क्या हैं सख्त निर्देश?
प्रशासन ने वायरस को रोकने के लिए थ्री-स्टेप मॉनिटरिंग प्लान लागू किया है:
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ट्रैवल हिस्ट्री: अस्पताल में आने वाले हर संदिग्ध मरीज से उसकी पिछली यात्रा की जानकारी ली जाएगी।
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मरीजों की पहचान: बुखार, सिरदर्द और मानसिक भ्रम जैसे लक्षणों वाले मरीजों को तुरंत आइसोलेट किया जाएगा।
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डिजिटल रिपोर्टिंग: किसी भी संदिग्ध मामले की जानकारी तुरंत सरकारी पोर्टल (IDSP-IHIP) पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।

कैसे फैलता है यह जानलेवा वायरस?
निपाह वायरस जुनोटिक है यानी यह जानवरों से इंसानों में आता है और फिर इंसानों से इंसानों में फैलता है:
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संक्रमित फल: 'फ्रूट बैट्स' (फल खाने वाले चमगादड़) के लार या मूत्र से दूषित हुए फलों को खाने से।
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सीधा संपर्क: संक्रमित व्यक्ति के पसीने, लार या खून के संपर्क में आने से (जैसा कि बंगाल में नर्सों के साथ हुआ)।
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जानवर: संक्रमित सूअरों या अन्य मवेशियों के जरिए।

दक्षिण भारत में ही बार-बार क्यों लौटता है निपाह?
विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण भारत (विशेषकर केरल और अब तमिलनाडु) में इसके बार-बार फैलने के पीछे कुछ भौगोलिक और सामाजिक कारण हैं:
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फ्रूट बैट्स की मौजूदगी: दक्षिण के जंगलों में Pteropus प्रजाति के चमगादड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं जो इस वायरस के मुख्य वाहक हैं।
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ताड़ी और ताजे फल: खजूर का कच्चा रस (ताड़ी) पीना और सीधे पेड़ों से गिरे ताजे फलों का सेवन यहां आम है। चमगादड़ अक्सर इन पेड़ों पर बैठते हैं।
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मजबूत हेल्थ सिस्टम: दक्षिण भारत का निगरानी तंत्र बहुत सक्रिय है इसलिए यहां मामले जल्दी पकड़ में आ जाते हैं।
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जलवायु परिवर्तन: वनों की कटाई के कारण चमगादड़ इंसानी बस्तियों के करीब आ रहे हैं।