इस Blood Group वालों को है Heart Attack का सबसे ज्यादा खतरा, शोध में हुआ बड़ा खुलासा

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 05:25 PM

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Heart Attack Risk: एक शोध के अनुसार, आपका ब्लड ग्रुप दिल की सेहत को प्रभावित करता है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ब्लड ग्रुप चाहे जो भी हो, खराब लाइफस्टाइल किसी के लिए भी जानलेवा हो सकती है।

Heart Attack Risk: बदलती जीवनशैली और खान-पान के बीच हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के मामले दुनियाभर में चिंता का विषय बने हुए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल की बीमारियों के लिए सिर्फ आपकी आदतें ही नहीं, बल्कि आपकी रगों में दौड़ रहा ब्लड ग्रुप भी जिम्मेदार हो सकता है? 

साल 2012 में 'आर्टेरियोस्क्लेरोसिस' (Arteriosclerosis) में प्रकाशित एक व्यापक अध्ययन के अनुसार, कुछ खास ब्लड ग्रुप वाले लोगों में हृदय रोगों का जोखिम दूसरों की तुलना में काफी अधिक पाया गया है। वैज्ञानिकों ने 'O' ब्लड ग्रुप को दिल के लिए सबसे सुरक्षित माना है, जबकि 'Non-O' ग्रुप वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 

'O' ब्लड ग्रुप: दिल के लिए सबसे सुरक्षित कवच 

अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार, 'O' ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों में कोरोनरी हार्ट डिजीज और अन्य हृदय रोगों का खतरा सबसे कम होता है। यदि आपका ब्लड ग्रुप 'O' है, तो आप जेनेटिक रूप से दिल की बीमारियों के प्रति अधिक सुरक्षित श्रेणी में आते हैं। 

'Non-O' ग्रुप (A, B, AB) में बढ़ा जोखिम 

शोधकर्ताओं का दावा है कि 'O' समूह की तुलना में A, B और AB ब्लड ग्रुप वाले लोगों में हृदय रोग विकसित होने का खतरा 6% से 23% तक अधिक होता है। 

Blood Group 'A': इस ग्रुप के लोगों में 60 साल की उम्र से पहले स्ट्रोक (Stroke) होने की संभावना काफी अधिक पाई गई है। 

Blood Group 'AB': इस ग्रुप में स्ट्रोक का जोखिम 'O' के मुकाबले 1.6 से 7 गुना तक ज्यादा हो सकता है। 

क्यों बढ़ जाता है खतरा? (वैज्ञानिक कारण) 

विशेषज्ञों ने इन ब्लड ग्रुप्स में बढ़ते जोखिम के पीछे दो मुख्य वैज्ञानिक कारण बताए हैं: 

रक्त के थक्के (Clotting Factors): 'Non-O' रक्त समूहों में 'फैक्टर VIII' और 'वॉन विलेब्रैंड फैक्टर' जैसे प्रोटीन अधिक मात्रा में होते हैं। ये प्रोटीन रक्त को गाढ़ा करने और हानिकारक थक्के जमाने में मदद करते हैं, जिससे धमनियों में रुकावट पैदा होती है। 

सूजन (Inflammation): इन ब्लड ग्रुप्स के लोगों में इन्फ्लेमेटरी मार्कर्स का स्तर अधिक होता है। लंबे समय तक रहने वाली यह सूजन धमनियों को सख्त कर देती है, जिससे हार्ट अटैक का रास्ता साफ होता है।
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