मोदी सरकार का बड़ा तोहफा! अब ₹5000 की जगह हर महीने मिल सकती है ₹10,000 पेंशन, जानिए क्या है पूरी योजना

Edited By Updated: 23 Apr, 2026 11:57 PM

now instead of 5 000 you can get 10 000 pension every month

केंद्र की मोदी सरकार असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों को बुढ़ापे में बड़ी आर्थिक सुरक्षा देने की तैयारी में है। बढ़ती महंगाई और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार अटल पेंशन योजना (APY) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन की सीमा को ₹5,000 से बढ़ाकर...

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों को बुढ़ापे में बड़ी आर्थिक सुरक्षा देने की तैयारी में है। बढ़ती महंगाई और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार अटल पेंशन योजना (APY) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन की सीमा को ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह करने पर विचार कर रही है।

असंगठित क्षेत्र पर फोकस
भारत में रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, मजदूर और स्वरोजगार करने वाले लोग कुल वर्कफोर्स का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा हैं। इन लोगों के पास फिक्स सैलरी या पीएफ जैसी सुविधाएं नहीं होतीं, इसीलिए इनके लिए यह योजना जीवनदान साबित हो सकती है। मई 2015 में शुरू हुई इस योजना का मुख्य उद्देश्य बुढ़ापे में गारंटीड आर्थिक मदद देना है।

महंगाई को देखते हुए बदलाव की जरूरत
वर्तमान में इस योजना में 60 साल की उम्र के बाद ₹1,000 से ₹5,000 तक की गारंटीड पेंशन का प्रावधान है। हालांकि, महंगाई के दौर में इस राशि को अपर्याप्त माना जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, योजना से अब तक 9 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं, लेकिन लगभग आधे सदस्यों ने नियमित योगदान देना बंद कर दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.35 करोड़ नए सदस्य इस योजना का हिस्सा बने हैं।

गांव-गांव तक पहुंचेगी योजना
पेंशन नियामक PFRDA और वित्त मंत्रालय मिलकर इस नए प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। सरकार की योजना 'पेंशन सखी' और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) के जरिए इस स्कीम को देश के दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाने की है। खास बात यह है कि 26 जनवरी 2026 को कैबिनेट ने इस योजना को साल 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है।

सरकार पर नहीं पड़ेगा भारी बोझ
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पेंशन की राशि बढ़ाने से सरकार के खजाने पर कोई बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा। इसका मुख्य कारण यह है कि यह योजना काफी हद तक अंशधारकों (सब्सक्राइबर्स) के अपने योगदान पर ही आधारित है।

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