Edited By Parminder Kaur,Updated: 31 May, 2025 12:41 PM

केरल में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे ओडिशा के एक स्कूल टॉपर की खबर सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने तुरंत हस्तक्षेप किया है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं और...
नेशनल डेस्क. केरल में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे ओडिशा के एक स्कूल टॉपर की खबर सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने तुरंत हस्तक्षेप किया है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं और छात्र को वापस बुलाकर उसकी उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री राहत कोष से मिली आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद रायगढ़ जिला कलेक्टर ने काशीपुर विकासखंड की अदाजोर पंचायत के पोडापदर गांव के छात्र बलभद्र माझी को मुख्यमंत्री राहत कोष और रेडक्रॉस फंड से 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा विभाग को बलभद्र की आगे की पढ़ाई के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने और पूरी सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया है।
परिवार को भी मिलेगी मदद
मुख्यमंत्री ने बलभद्र के परिवार को भी विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत आजीविका सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए भी कहा है।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, बिषमकटक के मां मरकाम हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाले बलभद्र ने हाल ही में हुई प्लस टू आर्ट्स की परीक्षा में 517 अंकों के साथ स्कूल में टॉप किया था। परीक्षा खत्म होने के बाद बलभद्र अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अपने दोस्तों के साथ केरल दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने चले गए थे, जब परीक्षा के परिणाम घोषित हुए, तो बलभद्र के परिवार के सदस्यों, ग्रामीणों और स्कूल प्रशासन को यह जानकर बहुत खुशी हुई कि वह स्कूल के टॉपर बने हैं। हालांकि, उनकी उच्च शिक्षा को लेकर परिवार चिंतित था, क्योंकि बलभद्र उस समय केरल में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे थे।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने बलभद्र के बारे में यह खबर मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई की है। बलभद्र अब अपनी आगे की पढ़ाई के लिए केरल से वापस ओडिशा आएंगे। यह पहल दर्शाती है कि सरकार प्रतिभावान छात्रों की मदद के लिए कितनी तत्पर है।