Edited By Radhika,Updated: 01 Feb, 2026 03:45 PM

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपने ऐतिहासिक 9वें बजट भाषण में एक ऐसे शब्द का जिक्र किया, जो भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने वाला है—Orange Economy। इसे 'क्रिएटिव इकोनॉमी' भी कहा जाता है। सरकार का लक्ष्य भारत को केवल तकनीकी दिग्गज ही...
Orange Economy: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपने ऐतिहासिक 9वें बजट भाषण में एक ऐसे शब्द का जिक्र किया, जो भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने वाला है—Orange Economy। इसे 'क्रिएटिव इकोनॉमी' भी कहा जाता है। सरकार का लक्ष्य भारत को केवल तकनीकी दिग्गज ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा 'क्रिएटिव हब' बनाना है। इस क्षेत्र की क्षमता को देखते हुए शिक्षा और डिजाइनिंग के क्षेत्र में बड़े निवेश का ऐलान किया गया है।
क्या है Orange Economy?
आसान शब्दों में कहें तो 'ऑरेंज इकोनॉमी' वह आर्थिक तंत्र है जो मानवीय कल्पना और Creativity से लाभ कमाता है। इसमें एनीमेशन, वीडियो गेम, फिल्में, संगीत, डिजाइन, विज्ञापन और कला जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसका मुख्य आधार 'इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी' (IP) और संस्कृति है, जो न केवल पैसा कमाती है बल्कि समाज में सांस्कृतिक बदलाव भी लाती है।

AVGC सेक्टर में 20 लाख नौकरियों का महा-लक्ष्य
वित्त मंत्री ने एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) सेक्टर को भविष्य का गेम-चेंजर बताया। उन्होंने घोषणा की:
- नौकरियों की बौछार: साल 2030 तक इस क्षेत्र में 20 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी।
- क्रिएटर लैब्स: युवाओं को तैयार करने के लिए 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में 'AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स' बनाई जाएंगी। यह पहल 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज' के सहयोग से पूरी होगी।
डिजाइनिंग को नई उड़ान: पूर्वोत्तर में नया NID
भारत के डिजाइन उद्योग के विस्तार को देखते हुए वित्त मंत्री ने पूर्वी भारत (Eastern Region) में एक नया 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन' (NID) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य देश के हर कोने से डिजाइन टैलेंट को निखारना है।