बच्चों के स्कूल जाते ही सुरक्षा को लेकर चिंतित हो जाते हैं अभिभावक

Edited By Updated: 19 Sep, 2017 09:42 PM

parents are worried about safety as children go to school

वरूण ठाकुर ने पिछले पखवाड़े अपने सात वर्षीय बेटे प्रद्युम्न को स्कूल ....

नई दिल्ली: वरूण ठाकुर ने पिछले पखवाड़े अपने सात वर्षीय बेटे प्रद्युम्न को स्कूल के प्रवेश द्वार तक छोड़ा और उन्हें विश्वास था कि उनका बेटा गुडग़ांव के इस नामी स्कूल में सुरक्षित है लेकिन कुछ समय बाद प्रद्युम्न की स्कूल के शौचालय में हत्या हो गई जिससे न केवल ठाकुर की दुनिया उजड़ गई बल्कि देश भर के अभिभावकों का इस बात से विश्वास उठ गया कि स्कूल भी घर जितना ही सुरक्षित स्थान है। निजी और सरकारी स्कूलों से उत्पीडऩ और दुर्घटनाओं की खबर अकसर आती थीं लेकिन दूसरी कक्षा के इस छात्र की जघन्य हत्या ने सुरक्षा जैसे मूल मुद्दे पर बहस छेड़ दी। यह केवल रेयान इंटरनेशनल की बात नहीं है, जिसकी दिल्ली एनसीआर में कई शाखाएं हैं बल्कि दूसरे स्कूलों में भी सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। अभिभावकों ने कहा कि असुरक्षा का मुद्दा उठते ही स्कूल और सरकार सुरक्षा ऑडिट करा रहे हैं।

 

सीबीएसई की तथ्यान्वेषी टीम ने पाया कि रेयान इंटरनेशनल की शाखा की चारदीवारी टूटी हुई थी, सीसीटीवी कैमरों की संख्या पर्याप्त नहीं थी जिनमें कई काम नहीं कर रहे थे और बस संवाहक एवं चालक जैसे बाहरी लोग उसी शौचालय का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसका छात्र और शिक्षक करते थे। साथ ही शौचालय में ग्रिल भी नहीं थे। क्या दूसरे स्कूलों में भी इसी तरह की अव्यवस्था थी? इस सवाल से कई अभिभावक परेशान रहे, जिनमें से कुछ ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। कोलकाता के डाटा एनालिस्ट चिरदीप बनर्जी ने बताया, ‘‘घटना से मैं डरा हुआ और चिंतित हूं। मेरा बेटा जैसे ही स्कूल जाता है, मैं उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हो जाता हूं।’’ बनर्जी का पांच वर्ष का बेटा है।

 

अखिल भारतीय अभिभावक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि अभिभावकों ने कई प्रदर्शन किए लेकिन वे महज दिखावा भर थे। अग्रवाल ने आज केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात की। उन्होंने सुझाव दिए कि स्कूल प्रबंधन समितियों में कम से कम 50 फीसदी अभिभावक शामिल हों। मंत्री को इस मुद्दे पर पत्र सौंपने वाले अग्रवाल ने पीटीआई से कहा, ‘‘स्कूलों में शक्ति नियंत्रण को बदलने की जरूरत है क्योंकि अभिभावकों को छोड़कर हर किसी के निहित स्वार्थ हैं। एकमात्र समाधान है कि स्कूल प्रबंधन समितियों में अभिभावकों का कम से कम 50 फीसदी प्रतिनिधित्व हो।’’  उन्होंने कहा कि जावड़ेकर हमारे सुझावों पर विचार करने पर सहमत हैं। उनके विचार में अभिभावकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। उन्होंने कहा, ‘‘वे निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने पर काफी पैसा खर्च करते हैं, तो कम से कम अपने बच्चों की सुरक्षा की उम्मीद तो कर सकते हैं।’’  प्रद्युम्न की हत्या पर निराशा जताते हुए एलकॉन इंटरनेशनल स्कूल के पिं्रसिपल अशोक पांडेय ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा पर ‘‘प्रमुखता से ध्यान देना होगा।’’  उन्होंने कहा कि बच्चे के स्कूल परिसर में दाखिल होते ही उनकी जिम्मेदारी स्कूल अधिकारियों को लेनी होगी।


 

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