Edited By Parveen Kumar,Updated: 19 Jan, 2026 12:18 AM

पश्चिम बंगाल में होने वाले अहम विधानसभा चुनाव से पहले जैसे-जैसे चुनावी विमर्श जोर पकड़ रहा है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी दो रैलियों में तृणमूल कांग्रेस सरकार को निशाना बनाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति को और धार देने का काम किया...
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में होने वाले अहम विधानसभा चुनाव से पहले जैसे-जैसे चुनावी विमर्श जोर पकड़ रहा है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी दो रैलियों में तृणमूल कांग्रेस सरकार को निशाना बनाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति को और धार देने का काम किया है। प्रधानमंत्री ने अपनी इन रैलियों में घुसपैठ तथा कानून व्यवस्था को भाजपा के मुख्य चुनावी मुद्दों के रूप में सामने रखा।
पश्चिम बंगाल में 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव को तृणमूल कांग्रेस के ‘‘महाजंगल राज'' और भाजपा के शासन मॉडल के बीच की लड़ाई के रूप में पेश करते हुए मोदी ने सत्तारूढ़ पार्टी पर चुनावी लाभ के लिए घुसपैठियों को संरक्षण देकर ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़'' करने का आरोप लगाया और कहा कि केवल भाजपा ही व्यवस्था बहाल कर सकती है, विकास को पुनर्जीवित कर सकती है तथा राज्य की सीमाओं को सुरक्षित कर सकती है।
शनिवार को मालदा जिले में और रविवार को हुगली जिले के सिंगूर में हुई दोनों रैलियों में, मोदी ने बार-बार घुसपैठ का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान अवैध प्रवासन फला-फूला है। भाजपा ने राज्य में चुनाव से पहले अपनी रणनीति को और धार देने का काम किया है जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है। मोदी का बंगाल दौरा शनिवार को सरकारी कार्यक्रमों और राजनीतिक संदेशों के मिले-जुले रूप के साथ शुरू हुआ।
मालदा रैली को संबोधित करने से पहले उन्होंने लगभग 3,250 करोड़ रुपये की रेल और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की शुरुआत की और हावड़ा एवं गुवाहाटी के बीच पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर केंद्र सरकार के विकास के वादे को रेखांकित किया। हालांकि, रैली में सारा ध्यान निर्णायक रूप से घुसपैठ पर केंद्रित हो गया। उत्तर बंगाल के मुस्लिम बहुल जिले में रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि अवैध प्रवासन ने बंगाल की जनसांख्यिकी को बदल दिया है, दंगों को बढ़ावा दिया है और यह तृणमूल कांग्रेस के ‘‘संरक्षण एवं गिरोह राज'' के तहत फल-फूल रहा है।
मोदी ने कहा, ‘‘बंगाल के लिए घुसपैठ एक बहुत बड़ी चुनौती है''। उन्होंने दावा किया कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘लोग मुझे बताते हैं कि कई जगहों पर भाषा और बोलने के लहजे में अंतर उभरने लगा है। घुसपैठियों की बढ़ती आबादी के कारण मालदा और मुर्शिदाबाद समेत कई इलाकों में दंगे होने लगे हैं।'' घुसपैठियों और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच गठबंधन का आरोप लगाते हुए मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर ‘‘गुंडागर्दी'' और ‘‘गरीबों को धमकाने तथा डराने'' की राजनीति का आरोप लगाया।
प्रधानमंत्री ने घुसपैठियों और सताए गए शरणार्थियों, विशेष रूप से मतुआ और नामशूद्र समुदायों के बीच एक राजनीतिक अंतर करने की भी कोशिश की, जो 2019 से भाजपा का एक प्रमुख समर्थक आधार रहे हैं। मतदाता सूचियों को लेकर जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पृष्ठभूमि में उन्होंने शरणार्थी बहुल क्षेत्रों के लोगों को पुन: आश्वस्त किया, जिनके बीच एसआईआर के कारण चिंता पैदा हो गई है। उन्होंने कहा, ‘‘यह मोदी की गारंटी है कि पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न से भागकर आए मतुआ और नामशूद्र परिवारों सहित वास्तविक शरणार्थियों को डरने की जरूरत नहीं है। संविधान उन्हें यहां रहने का अधिकार देता है और सीएए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।''