Edited By Radhika,Updated: 25 Feb, 2026 06:06 PM

इजरायल की राजधानी तेल अवीव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को लेकर बेहद सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि रक्षा और आर्थिक क्षेत्रों में भी...
नेशनल डेस्क: इजरायल की राजधानी तेल अवीव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को लेकर बेहद सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि रक्षा और आर्थिक क्षेत्रों में भी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। तेल अवीव की प्रसिद्ध विशेषज्ञ लॉरेन डगन अमोस ने इस दौरे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इजरायल में पीएम मोदी के आगमन को लेकर गर्व, आभार और उत्साह का माहौल है।
2014 के बाद बदला नजरिया
लॉरेन अमोस ने भारत-इजरायल संबंधों के इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि हालांकि पूर्ण राजनयिक संबंध जनवरी 1992 में स्थापित हुए थे, लेकिन 2014 के बाद इन रिश्तों में एक बड़ा बदलाव आया है। पहले ये संबंध काफी हद तक रक्षा तक सीमित और कम चर्चा में रहते थे, लेकिन अब यह साझेदारी खुलकर आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों तक फैल चुकी है।

सुरक्षा सहयोग पर बात करते हुए अमोस ने कहा
दोनों देश घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चरमपंथी खतरों का सामना कर रहे हैं। हालिया सैन्य अभियानों और गाजा संघर्ष ने 'एयर डिफेंस सिस्टम' (हवाई रक्षा प्रणालियों) की अहमियत साबित की है। दोनों देश इस क्षेत्र में एक-दूसरे के अनुभवों से काफी कुछ सीख सकते हैं। पिछले दो वर्षों में रक्षा सहयोग और गहरा हुआ है, जिसमें हाल ही में भारतीय रक्षा अधिकारियों के दौरे के दौरान हस्ताक्षरित समझौते शामिल हैं।
पुरानी दोस्ती का नया दौर
इजरायल और भारत के बीच निवेश की नींव बहुत पुरानी है। अमोस ने याद दिलाया कि नरेंद्र मोदी ने 2002 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में इजरायल का दौरा किया था और 'नेटाफिम' जैसी सिंचाई कंपनियों के निवेश की समीक्षा की थी। कृषि और जल प्रबंधन हमेशा से प्राथमिकता रहे हैं। इस यात्रा के दौरान कई पुराने समझौतों को आगे बढ़ाया जा सकता है, जो भविष्य के बड़े समझौतों का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

ऐतिहासिक महत्व और वैश्विक संदेश
यह प्रधानमंत्री मोदी की दूसरी इजरायल यात्रा है। अमोस के अनुसार, 2017 से पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजरायल का दौरा नहीं किया था। वैश्विक उथल-पुथल और 7 अक्टूबर की घटनाओं के बाद भारत का इजरायल के प्रति अटूट समर्थन इस रिश्ते की मजबूती को दर्शाता है।