पीएम मोदी ने किया केम्पेगौड़ा की मूर्ति का अनावरण, जानें कौन हैं केम्पेगौड़ा

Edited By Updated: 11 Nov, 2022 04:47 PM

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बेंगलुरु के संस्थापक नादप्रभु केम्पेगौड़ा की 108 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया

नेशनल डेस्कः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बेंगलुरु के संस्थापक नादप्रभु केम्पेगौड़ा की 108 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया, साथ ही दक्षिण भारत की पहली ‘वंदे भारत' एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई और केआईए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 का उद्घाटन किया।

प्रधानमंत्री मोदी के इन कार्यक्रमों के कई राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं, क्योंकि कर्नाटक में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले बेंगलुरु पहुंचे मोदी ने संत-कवि कनक दास की जयंती के मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि भक्ति का मार्ग दिखाने एवं सामाजिक एकता का संदेश देने के लिए राष्ट्र सदैव उनका आभारी रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए भौतिक ढांचे के साथ-साथ सामाजिक ढांचे को भी मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते हुए शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार ‘स्पीड' को भारत की आकांक्षा और ‘स्केल' को भारत की ताकत मानती है। प्रधामनंत्री मोदी ने यहां पहुंचने के बाद कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। सबसे पहले वह यहां विधान सौध के पास विधायक गृह परिसर में एक कार्यक्रम में शामिल हुए और वहां संत-कवि कनक दास की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने परिसर में रामायण के रचियता महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘ आज, कनक दास जयंती के अवसर पर, मैंने बेंगलुरु में श्री कनक दास को श्रद्धांजलि दी। हमें भक्ति का मार्ग दिखाने, कन्नड़ साहित्य को समृद्ध करने और सामाजिक एकता का संदेश देने के लिए हम हमेशा उनके आभारी रहेंगे।'' प्रधानमंत्री ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘ बेंगलुरु में आज सुबह महर्षि वाल्मीकि को भी श्रद्धांजलि दी।''

कनक दास का जन्म आज ही के दिन 1509 में हुआ था। उनके माता-पिता ने उनका नाम थिम्मप्पा नायक रखा था। हर साल उनकी जयंती को ‘कनक जयंती' के तौर पर मनाया जाता है और इस दिन क्षेत्रीय सार्वजनिक अवकाश होता है। ‘कीर्तन' और ‘उगाभोग' (कन्नड़ भाषा की संगीत रचनाएं) के लिए उन्होंने काफी लोकप्रियता हासिल की।

कनक दास और वाल्मीकि राज्य में लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं, खासकर कुरुबा और वाल्मीकि (अनुसूचित जाति) समुदायों के बीच। प्रधानमंत्री मोदी के इन दोनों को श्रद्धांजिल अर्पित करने के इस कार्यक्रम के कई राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं, क्योंकि राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में कुरुबा और वाल्मीकि समुदाय कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके बाद, प्रधानमंत्री बेंगलुरु के प्रधानमंत्री क्रांतिवीर संगोली रायन्ना (केएसआर) स्टेशन के लिए रवाना हुए। रास्ते में यहां कर्नाटक लोक सेवा आयोग के कार्यालय के समीप एक प्रमुख चौराहे पर मोदी ने अपनी कार रुकवाई और पार्टी कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों की उत्साही भीड़ का हाथ हिलाकर अभिवादन किया।

 

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