Edited By Sahil Kumar,Updated: 17 Feb, 2026 07:26 PM

पॉलीमेटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड पर ₹157.20 करोड़ के बकाया भुगतान को लेकर बैंकरप्सी का खतरा मंडराने लगा है। ऑपरेशनल क्रेडिटर्स ने कंपनी के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू करने की याचिका दायर की है, जिस पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), चेन्नई...
नेशनल डेस्कः चेन्नई स्थित पॉलीमेटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के खिलाफ ₹157.20 करोड़ के कथित बकाया भुगतान को लेकर इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है। ऑपरेशनल क्रेडिटर्स ने इस मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), चेन्नई का रुख किया, जिसके बाद ट्रिब्यूनल ने कंपनी को नोटिस जारी कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने एडवाइजरी सेवाओं की फीस और इक्विटी कमिटमेंट्स के भुगतान में डिफॉल्ट किया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कंपनी ने कई बार भुगतान का आश्वासन दिया और आंशिक भुगतान भी किया, लेकिन शेष बकाया राशि का निपटान नहीं किया गया।
ऑपरेशनल क्रेडिटर्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.वी. बालासुब्रमण्यम के साथ अधिवक्ता आदित्य भारत मनुबरवाला और अमोघ सिम्हा पेश हुए। उन्होंने ट्रिब्यूनल को बताया कि जनवरी 2025 में भेजे गए डिमांड नोटिस का कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। हालांकि, याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि कंपनी ने बकाया राशि के एक हिस्से का भुगतान किया है और देनदारी को स्वीकार भी किया है।
कंपनी की ओर से अधिवक्ता रोशन ने ट्रिब्यूनल के समक्ष नोटिस प्राप्त करने की पुष्टि की। यदि ट्रिब्यूनल इस याचिका को स्वीकार कर लेता है, तो कंपनी के खिलाफ कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू हो सकता है। ऐसी स्थिति में एक अंतरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल की नियुक्ति की जाएगी, जो कंपनी के प्रबंधन और संचालन की निगरानी करेगा।