Edited By Purnima Singh,Updated: 28 Aug, 2026 11:35 AM

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कृषि-उद्यमियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के लिए 'एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड' (AIF) के ज़रिए ज़्यादा आर्थिक मदद का ऐलान किया ...
गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कृषि-उद्यमियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के लिए 'एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड' (AIF) के ज़रिए ज़्यादा आर्थिक मदद का ऐलान किया। अब इन फायदों को 'प्रधानमंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज' (PMFME) योजना के तहत मिलने वाले इंसेंटिव के साथ भी जोड़ा जा सकता है।
2 करोड़ रुपये तक का कम ब्याज वाला लोन
X पर एक पोस्ट में, CM सरमा ने कहा कि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड अब कृषि-उद्यमियों और FPOs को 2 करोड़ रुपये तक का कम ब्याज वाला लोन देता है। इसका मकसद कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना और फूड प्रोसेसिंग गतिविधियों में मदद करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन लाभार्थियों ने पहले ही AIF योजना के तहत लोन लिया है, वे PMFME योजना के तहत भी अतिरिक्त मदद ले सकते हैं। CM सरमा ने योग्य उद्यमों को मिलने वाले मिले-जुले फायदों के बारे में बताते हुए कहा, "फूड प्रोसेसिंग उद्यमों के लिए और ज़्यादा मदद।"
AIF के तहत 3% ब्याज सब्सिडी
AIF योजना के तहत, लाभार्थी 3% ब्याज सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं, जिससे योग्य कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए लोन लेने की असल लागत कम हो जाती है।
PMFME के तहत 35% कैपिटल सब्सिडी
वहीं, PMFME योजना योग्य फूड प्रोसेसिंग उद्यमों के लिए 35% की कैपिटल सब्सिडी देती है। मुख्यमंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, व्यक्तिगत उद्यमों के लिए सब्सिडी 10 लाख रुपये तक हो सकती है, जबकि कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 3 करोड़ रुपये तक की मदद मिल सकती है।
फूड प्रोसेसिंग और कृषि गतिविधियों को मिलेगा फायदा
इन दोनों योजनाओं के एक साथ आने से फूड प्रोसेसिंग और उससे जुड़ी कृषि गतिविधियों में शामिल उद्यमों को ज़्यादा आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है। इससे वे इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर सकेंगे, अपने कामकाज का विस्तार कर सकेंगे और वैल्यू एडिशन में सुधार कर सकेंगे।
AIF और PMFME योजनाओं का उद्देश्य
एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का मकसद फसल कटाई के बाद के इंफ्रास्ट्रक्चर और कम्युनिटी फार्मिंग एसेट्स में निवेश को बढ़ावा देना है, जबकि PMFME योजना माइक्रो फूड प्रोसेसिंग उद्यमों को अपग्रेड करने और उन्हें फॉर्मल बनाने पर ध्यान देती है।
उद्यमियों और FPOs के लिए बेहतर फाइनेंसिंग
योग्य लाभार्थियों को दोनों योजनाओं के तहत इंसेंटिव को एक साथ लेने की इजाज़त देने से फाइनेंसिंग की लागत कम हो सकती है और उन उद्यमियों और FPOs के लिए कैपिटल तक पहुंच बेहतर हो सकती है जो फूड प्रोसेसिंग और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना या उसका विस्तार करना चाहते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
CM सरमा का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मज़बूत करने और टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करने के लिए कृषि उद्यमिता, फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दे रही है।