Edited By Anu Malhotra,Updated: 06 Mar, 2026 08:55 AM

जायदाद के बंटवारे को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह डर रहता है कि अगर वसीयत कोर्ट के स्टाम्प पेपर पर नहीं लिखी गई, तो वह रद्दी का टुकड़ा है। कई बुजुर्ग अपनी अंतिम इच्छा सादे कागज पर लिख तो देते हैं, लेकिन परिवार वाले उसे कानूनी रूप से कमजोर मान लेते...
Handwritten Will: जायदाद के बंटवारे को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह डर रहता है कि अगर वसीयत कोर्ट के स्टाम्प पेपर पर नहीं लिखी गई, तो वह रद्दी का टुकड़ा है। कई बुजुर्ग अपनी अंतिम इच्छा सादे कागज पर लिख तो देते हैं, लेकिन परिवार वाले उसे कानूनी रूप से कमजोर मान लेते हैं। हकीकत यह है कि भारतीय कानून सादे कागज पर हाथ से लिखी वसीयत को भी उतनी ही अहमियत देता है जितनी किसी रजिस्टर्ड दस्तावेज को, बशर्ते आपने एक छोटी सी लेकिन सबसे बड़ी कानूनी शर्त पूरी की हो।
कानून की नजर में सादे कागज की ताकत
भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के नियम बहुत लचीले हैं। वसीयत बनाने के लिए आपको न तो महंगे वकील की जरूरत है और न ही किसी विशेष फॉर्म या स्टाम्प पेपर की। अगर कोई व्यक्ति अपनी पूरी होश-ओ-हवास में एक साधारण पन्ने पर यह लिख देता है कि उसके बाद उसकी संपत्ति का मालिक कौन होगा, तो वह एक पक्का कानूनी दस्तावेज है। इसे रजिस्टर कराना भी अनिवार्य नहीं है, यानी घर बैठे लिखी गई चिट्ठी भी वसीयत का काम कर सकती है।
एक छोटी चूक और संपत्ति पर अधिकार खत्म
सादे कागज पर लिखी गई इस वसीयत में सबसे बड़ी जान 'गवाहों' के हस्ताक्षर में होती है। कानून कहता है कि वसीयत लिखने वाले के साइन के साथ-साथ कम से कम दो चश्मदीद गवाहों के दस्तखत उस पर होने ही चाहिए। अगर वसीयत करने वाले ने सब कुछ सही लिखा है लेकिन उस पर गवाहों की गवाही (साइन) दर्ज नहीं है, तो वह कागज कोर्ट में टिक नहीं पाएगा। बिना गवाहों के उस कागज की कानूनी वैल्यू शून्य हो जाती है और उसे वसीयत माना ही नहीं जाता।
गवाह न होने पर क्या होगा?
अगर किसी बुजुर्ग ने अपनी इच्छा लिख दी लेकिन उस पर गवाहों के साइन नहीं करवाए, तो उनकी मृत्यु के बाद उस कागज को अनदेखा कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में संपत्ति का बंटवारा उस कागज के हिसाब से नहीं, बल्कि कानून के सामान्य नियमों के मुताबिक होगा। इसका मतलब है कि वसीयत में जिसे आपने ज्यादा हिस्सा देना चाहा था, उसे कुछ नहीं मिलेगा और संपत्ति सभी कानूनी वारिसों में बराबर या तय कानूनी हिस्सेदारी के हिसाब से बांट दी जाएगी। इसलिए, वसीयत चाहे हाथ से लिखें या टाइप करवाएं, दो गवाहों के साइन लेना कभी न भूलें।