95 RON Petrol: केंद्र का बड़ा फैसला: 1 अप्रैल से पूरे देश में ये पेट्रोल अनिवार्य, जानें आपकी गाड़ी पर क्या पड़ेगा असर?

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 05:12 PM

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भारत में ईंधन के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, जो सीधे आपकी ड्राइविंग और जेब पर असर डालने वाला है। 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में पेट्रोल की परिभाषा बदलने जा रही है। सरकार ने अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में E20...

नेशनल डेस्क: भारत में ईंधन के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, जो सीधे आपकी ड्राइविंग और जेब पर असर डालने वाला है। 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में पेट्रोल की परिभाषा बदलने जा रही है। सरकार ने अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में E20 पेट्रोल (20% एथनॉल मिश्रित) और 95 RON (रिसर्च ऑक्टेन नंबर) वाले ईंधन की बिक्री को अनिवार्य कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की ताजा अधिसूचना के अनुसार, अब देशभर में केवल उच्च गुणवत्ता वाला और पर्यावरण के अनुकूल पेट्रोल ही मिलेगा। यह फैसला न केवल विदेशों से तेल आयात करने के भारी-भरकम खर्च को कम करेगा, बल्कि प्रदूषण की समस्या से निपटने में भी एक बड़ा हथियार साबित होगा।

आखिर क्या है 95 RON और क्यों है यह खास?

अक्सर हम पेट्रोल पंप पर 'प्रीमियम' पेट्रोल देखते हैं, यह नया नियम उसी प्रीमियम क्वालिटी को मानक बनाने जा रहा है। आमतौर पर हम जो साधारण पेट्रोल इस्तेमाल करते हैं, उसका ऑक्टेन नंबर 90 के आसपास होता है। 95 RON पेट्रोल का मतलब है कि यह ईंधन अधिक दबाव झेल सकता है और इंजन के भीतर समय से पहले नहीं जलता (प्री-इग्निशन)।

जब ईंधन सही समय पर जलता है, तो इंजन में 'नॉकिंग' (खटखटाहट की आवाज) नहीं होती। इससे वाहन को बेहतर पावर मिलती है, एक्सीलरेशन स्मूद होता है और इंजन की उम्र भी लंबी होती है। खासकर आधुनिक टर्बोचार्ज्ड या हाई-परफॉर्मेंस इंजनों के लिए यह ईंधन किसी वरदान से कम नहीं है।

पुराने और नए वाहनों पर कैसा होगा असर?

इस बदलाव को लेकर सबसे बड़ा सवाल उन लोगों के मन में है जिनके पास पुराने वाहन हैं। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि 2023 के बाद बनी अधिकांश गाड़ियाँ E20 ईंधन के हिसाब से ही तैयार की गई हैं, इसलिए उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी। लेकिन पुराने वाहनों के मालिकों को थोड़ा सतर्क रहना होगा:

  • माइलेज: पुराने वाहनों में माइलेज में 3 से 7 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखने को मिल सकती है।

  • पुर्जे: एथनॉल की अधिक मात्रा से पुराने इंजनों के रबर या प्लास्टिक के पाइप और अन्य पुर्जों पर असर पड़ने की आशंका है।

  • सुरक्षा: हालांकि, 95 RON की उच्च गुणवत्ता इस कमी की भरपाई इंजन की बेहतर सेहत और कम मेंटेनेंस के जरिए कर सकती है।

सरकार का दूरगामी लक्ष्य और चुनौतियां

एथनॉल का उत्पादन गन्ने, मक्का और अनाज से होता है, जिससे सीधे तौर पर भारतीय किसानों को फायदा पहुंचेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 फरवरी की अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि तेल कंपनियाँ अब भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के कड़े पैमानों के तहत ही पेट्रोल बेचेंगी। सरकार ने यह भी कहा है कि कुछ दुर्गम या विशेष क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर सीमित समय के लिए इस नियम में छूट दी जा सकती है।

वाहन चालकों के लिए सलाह: अगर आप पुरानी गाड़ी चला रहे हैं, तो विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इंजन की नियमित सर्विसिंग कराते रहें और समय-समय पर फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स की जांच करवाएं ताकि नया ईंधन आपके सफर में कोई बाधा न बने।

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