Edited By Rohini Oberoi,Updated: 04 Jun, 2026 03:37 PM

महाराष्ट्र के प्रमुख आईटी हब पुणे से कॉरपोरेट जगत को झकझोर देने वाली एक बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां स्थित एक टेक कंपनी 'थिंक टेक्नोलॉजी इंडिया' (Thynk Technology India) ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के अचानक अपने कामकाज...
Pune IT Fraud : महाराष्ट्र के प्रमुख आईटी हब पुणे से कॉरपोरेट जगत को झकझोर देने वाली एक बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां स्थित एक टेक कंपनी 'थिंक टेक्नोलॉजी इंडिया' (Thynk Technology India) ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के अचानक अपने कामकाज (Operations) बंद कर दिए हैं। इस अचानक हुई तालाबंदी के कारण सॉफ्टवेयर इंजीनियरों, नए ग्रेजुएट्स और इंटर्न्स सहित 700 से अधिक कर्मचारी रातों-रात बेरोजगार हो गए हैं।
कंपनी पर कर्मचारियों की सैलरी डकारने, बाउंस चेक देने और बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी (Financial Misconduct) के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला बढ़ने पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।
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वहीं पुणे के हिंजवड़ी (Hinjewadi) थाना पुलिस के अनुसार यह पूरा मामला एक 25 साल के इंटर्न द्वारा दर्ज कराई गई आधिकारिक शिकायत के बाद सामने आया। पुलिस ने गिरफ्तार सीईओ के साथ-साथ कंपनी के हेड ऑफ ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट और ह्यूमन रिसोर्सेज (HR) मैनेजर के खिलाफ भी धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) का मुकदमा दर्ज किया है। वहीं पुलिस का कहना है कि अब तक 30 से अधिक इंटर्न्स और कर्मचारी अपनी समान शिकायतों के साथ पुलिस प्रशासन के पास पहुंच चुके हैं।

अचानक दफ्तर पर लटका मिला ताला
पीड़ित कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी ने अप्रैल महीने में अचानक अपना काम पूरी तरह रोक दिया। जब कर्मचारी हमेशा की तरह दफ्तर पहुंचे तो वहां मुख्य दरवाजे पर ताला लटका मिला और प्रबंधन का कोई भी प्रतिनिधि वहां मौजूद नहीं था। कंपनी के अधिकारियों ने फोन बंद कर लिए जिससे कर्मचारियों का न तो बकाया वेतन मिल सका और न ही वे दफ्तर से अपना जरूरी सामान निकाल पाए।
जांच में सामने आया है कि इस कंपनी ने साल 2025 में अपना कामकाज शुरू किया था। कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। नौकरी पर रखते वक्त कंपनी ने हर कर्मचारी और इंटर्न से लैपटॉप देने और ऑनबोर्डिंग प्रक्रियाओं के नाम पर 15,000 रुपये का सिक्योरिटी डिपॉजिट (सुरक्षा राशि) नकद जमा कराया था। शुरुआत में कंपनी ने भरोसा जीतने के लिए कुछ महीनों तक समय पर सैलरी और स्टाइपेंड (वजीफा) दिया लेकिन जनवरी 2026 से भुगतान पूरी तरह से रोक दिया गया। जब कर्मचारियों ने दबाव बनाया, तो प्रबंधन ने उन्हें चेक थमा दिए जो बाद में बैंक में बाउंस हो गए। इंटर्न्स का आरोप है कि उन्हें न तो कभी लैपटॉप दिए गए और न ही ट्रेनिंग का पैसा मिला।

पुलिस और लेबर कोर्ट में पहुंची जंग
पूर्व कर्मचारियों के अनुसार जब भी वे सैलरी मांगते थे तो मैनेजमेंट 'इंटरनल ऑडिट' (आंतरिक जांच) और 'फंडिंग में देरी' का बहाना बनाकर उन्हें टाल देता था। जिसके बाद परेशान होकर पीड़ित कर्मचारियों ने 20 अप्रैल को पुणे पुलिस से मदद की गुहार लगाई। इसके साथ ही कई पीड़ितों ने श्रम विभाग (Labour Authorities) में भी शिकायत दर्ज कराई है।
आरोप है कि कंपनी नए उम्मीदवारों से डिपॉजिट के नाम पर पैसे वसूल रही थी और उसी पैसे का इस्तेमाल अपने रोजमर्रा के खर्चों को चलाने के लिए कर रही थी। फिलहाल पुलिस ने कंपनी के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच शुरू कर दी है।