दिल्ली में वायु प्रदूषण पर संसद में चर्चा हो, प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं: राहुल

Edited By Updated: 28 Nov, 2025 06:24 PM

rahul demands discussion in parliament on delhi s air pollution

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के कारण पैदा हुई ‘स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति' पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कथित चुप्पी को लेकर शुक्रवार को सवाल खड़े किए और कहा कि इस विषय पर एक दिसंबर से शुरू हो रहे...

नेशनल डेस्क: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के कारण पैदा हुई ‘स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति' पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कथित चुप्पी को लेकर शुक्रवार को सवाल खड़े किए और कहा कि इस विषय पर एक दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक ठोस कार्य योजना की मांग भी की और सवाल किया कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर कोई तत्परता या जवाबदेही क्यों नहीं दिखा रही है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर ‘वॉरियर मॉम्स: मदर्स ऑफ क्लीन एयर' नामक संस्था की महिलाओं के साथ संवाद किया और इसका वीडियो अपने व्हाट्सएप चैनल पर जारी किया। इस बातचीत के दौरान कई महिलाओं ने वायु प्रदूषण के कारण अपने बच्चों की सेहत को लेकर चिंता जताई।

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राहुल गांधी ने ‘एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ‘‘मैं जिस भी मां से मिलता हूं, वह मुझसे एक ही बात कहती है: उसका बच्चा जहरीली हवा में सांस लेते हुए बड़ा हो रहा है। वे थके हुए, डरे हुए और गुस्से में हैं।'' उनका कहना था, ‘‘मोदी जी, हमारे सामने बच्चों का दम घुट रहा है। आप कैसे चुप रह सकते हैं? आपकी सरकार कोई तत्परता, कोई योजना, कोई जवाबदेही क्यों नहीं दिखाती?''

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘भारत को वायु प्रदूषण पर तत्काल, विस्तृत चर्चा और इस स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए एक ठोस एवं व्यावहारिक कार्य योजना की आवश्यकता है।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘हमारे बच्चे स्वच्छ हवा के हकदार हैं - बहानेबाजी और ध्यान भटकाने के नहीं।'' कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने वीडियो में कहा कि हर कोई प्रदूषण से प्रभावित है, चाहे वह दिल्ली में रहने वाला सबसे गरीब व्यक्ति हो या सबसे अमीर व्यक्ति। उनका कहना था, ‘‘यदि आपके पास 500 से 1000 वाणिज्यिक इकाइयां हैं जो दिल्ली को प्रदूषित कर रही हैं, तो उनके पास राजनीतिक शक्ति है और समस्या यह है कि औसत नागरिक बिल्कुल भी संगठित नहीं है। इसलिए, उनके पास कोई राजनीतिक शक्ति नहीं है।'' उन्होंने महिलाओं से कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने के मामले में उनके पास पहले से ही विकल्प हैं, लेकिन भारत में बहुत सारे लोगों के पास वह विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा,‘‘ आप डॉक्टर के पास जा सकते हैं लेकिन बहुत से ऐसे लोग हैं जो डॉक्टर के पास नहीं जा सकते।

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