Edited By Anu Malhotra,Updated: 26 Feb, 2026 02:24 PM

भारतीय रेलवे अब पटरियों के साथ-साथ डिजिटल ट्रैक पर भी सुपरफास्ट रफ़्तार से दौड़ने की तैयारी कर चुकी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल यात्रियों को राहत देते हुए एक ऐसी व्यवस्था का आगाज़ किया है, जिससे अब मुआवजे के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने...
नेशनल डेस्क: भारतीय रेलवे अब पटरियों के साथ-साथ डिजिटल ट्रैक पर भी सुपरफास्ट रफ़्तार से दौड़ने की तैयारी कर चुकी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल यात्रियों को राहत देते हुए एक ऐसी व्यवस्था का आगाज़ किया है, जिससे अब मुआवजे के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने का दौर इतिहास बन जाएगा। रेलवे ने 'इलेक्ट्रॉनिक रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल' यानी e-RCT पोर्टल लॉन्च कर दिया है, जो हादसों, सामान के नुकसान या किराये से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
यह नया सिस्टम पूरी तरह डिजिटल है, जिसका सीधा अर्थ है कि अब पीड़ित या दावेदार घर बैठे ही अपना केस दर्ज करा सकेंगे। e-RCT की कार्यप्रणाली को इतना सरल बनाया गया है कि इसमें आवेदन से लेकर सुनवाई और अंतिम फैसले तक की पूरी यात्रा ऑनलाइन ही तय होगी। इसमें चेकलिस्ट आधारित स्क्रूटनी और दस्तावेजों को अपलोड करने की सुविधा दी गई है, जिससे कागजी कार्रवाई का बोझ खत्म हो जाएगा। सबसे खास बात यह है कि अब सुनवाई के लिए अदालत में शारीरिक रूप से मौजूद रहना अनिवार्य नहीं होगा, क्योंकि 'ई-हियरिंग' के जरिए पक्षकार दूर बैठे ही अपनी बात रख सकेंगे।
रेल मंत्री का मानना है कि इस पोर्टल से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि पेंडिंग मामलों का बोझ भी कम होगा। केस के स्टेटस को रीयल-टाइम ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे आम जनता का भरोसा सिस्टम पर और मजबूत होगा।
रेलवे में इस बड़े सुधार के साथ-साथ अश्विनी वैष्णव ने डिजिटल सुरक्षा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि इंटरनेट की दुनिया में सक्रिय प्लेटफॉर्म्स अब कंटेंट की जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। मानवीय समाज और संस्थाओं के बीच विश्वास बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि ये प्लेटफॉर्म्स बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और नागरिकों की प्राइवेसी को प्राथमिकता दें।
AI के इस दौर में बढ़ते खतरों पर बात करते हुए उन्होंने 'सिंथेटिक कंटेंट' पर भी कड़े नियम लागू करने के संकेत दिए। रेल मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति की पहचान, चेहरा या आवाज का इस्तेमाल उसकी अनुमति के बिना सिंथेटिक कंटेंट (जैसे डीपफेक) बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इन सुरक्षा मानकों और जवाबदेही का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें कानूनी परिणामों के लिए तैयार रहना होगा। यह कदम न केवल रेलवे के कामकाज को आधुनिक बना रहा है, बल्कि सुरक्षित डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा बदलाव भी है।