Edited By Sahil Kumar,Updated: 15 Oct, 2026 07:45 PM

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बृहस्पतिवार को बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरे देश से वापसी हो गयी है और इसी दिन दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में उत्तर-पूर्व मानसून की बारिश शुरू हो गई।
नई दिल्लीः भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बृहस्पतिवार को बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरे देश से वापसी हो गयी है और इसी दिन दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में उत्तर-पूर्व मानसून की बारिश शुरू हो गई। आईएमडी ने बताया कि तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे में पूर्वोत्तर मानसून की गतिविधियां दर्ज की गईं।
मौसम विभाग ने अपने दैनिक पूर्वानुमान में कहा, ''पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत के साथ 21 अक्टूबर तक दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने और कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।'' भारत में मानसून मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला दक्षिण-पश्चिम मानसून है, जो जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है।
दूसरा पूर्वोत्तर मानसून है, जिसे लौटता हुआ मानसून भी कहा जाता है। यह अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश के कुछ हिस्सों को प्रभावित करता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर खरीफ फसलों के चक्र पर इसके सीधे प्रभाव के कारण। इसकी तुलना में कम तीव्रता वाला पूर्वोत्तर मानसून रबी फसलों की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
आईएमडी के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो 868.6 मिलीमीटर के सामान्य औसत से 12.6 प्रतिशत कम है। बारिश में कमी का एक प्रमुख कारण उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में जारी अल नीनो की स्थिति रही है। यह स्थिति जून में उभरी थी और तब से इसकी तीव्रता बढ़ रही है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) समेत वैश्विक मौसम एजेंसियों ने अनुमान जताया है कि इस साल अल नीनो की स्थिति दिसंबर 2026 में अपने चरम पर पहुंच सकती है। यह 1950 में रिकॉर्ड रखना शुरू किए जाने के बाद से सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक हो सकता है। इसके अलावा, अल नीनो की स्थिति फरवरी 2027 तक बने रहने का अनुमान है।