सड़क पर गड्ढे में गिरने से हुई थी 37 साल के शख्स की मौ'त, कोर्ट ने मृतक के परिजनों को दिया 30 लाख देने का आदेश

Edited By Updated: 22 Jun, 2026 01:04 AM

court orders rs 30 lakh to family of man who died after falling into a pothole

दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) द्वारा खोदे गए गड्ढे में गिरने से 37 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसके परिवार को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने साथ ही अधिकारियों से ऐसे मामलों में पीड़ितों को तत्काल...

नेशनल डेस्कः दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) द्वारा खोदे गए गड्ढे में गिरने से 37 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसके परिवार को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने साथ ही अधिकारियों से ऐसे मामलों में पीड़ितों को तत्काल वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए नीति तैयार करने पर विचार करने को कहा है।

न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की मृत्यु से परिवार अत्यंत असुरक्षित स्थिति में पहुंच जाता है और उसके लिए रोजमर्रा का जीवनयापन भी अनिश्चित हो जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों को सार्वजनिक प्राधिकारियों की लापरवाही से हुई घटनाओं में बुनियादी आर्थिक राहत पाने के लिए लंबी और खर्चीली कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति कौरव ने कहा कि वर्तमान मामले में मृतक की पत्नी, मां और तीन बच्चे वर्ष 2019 की घटना के बाद से कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीति बनाना कार्यपालिका का दायित्व है, लेकिन अदालत इस स्थिति से आंखें नहीं मूंद सकती। अदालत ने कहा कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2023 में सड़क निर्माण या मरम्मत कार्यों के दौरान हुए सड़क हादसों में 8,246 लोग घायल हुए और 3,904 लोगों की मौत हुई। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे हादसे अप्रत्याशित नहीं होते, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सार्वजनिक अवसंरचना कार्यों में अनिवार्य सुरक्षा उपायों को लागू करने में विफलता का परिणाम होते हैं।

अदालत ने मृतक के परिजनों की याचिका पर 29 मई को दिए अपने फैसले में कहा, ''ऐसे मामलों में शीघ्र मुआवजा प्रदान करने के लिए एक सुव्यवस्थित और प्रभावी नीतिगत ढांचा पीड़ितों और उनके परिवारों को बिना मुकदमेबाजी के तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे प्रभावित परिवारों की कठिनाइयां कम होंगी और सार्वजनिक अवसंरचना तथा सुरक्षा मानकों के लिए जिम्मेदार प्राधिकरणों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।'' अदालत ने कहा, "इसलिए संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में उपयुक्त नीति बनाने की व्यवहार्यता पर विचार करने का आग्रह किया जाता है, ताकि पात्र मामलों में समयबद्ध, मानवीय और प्रभावी ढंग से मुआवजे का वितरण सुनिश्चित किया जा सके।''

मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति 17 और 18 अप्रैल, 2019 की दरमियानी रात डीजेबी के कार्यालय के सामने ढिचाऊं कलां क्षेत्र में पाइपलाइन मरम्मत कार्य के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर गया था। अगली सुबह वह गड्ढे में पड़ा मिला और कुछ दिनों बाद चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई। डीजेबी ने अदालत में दलील दी कि खुदाई का कार्य एक निजी ठेकेदार द्वारा कराया गया था और गड्ढे के चारों ओर बैरिकेड लगाए गए थे। बोर्ड ने यह भी कहा कि संभव है कि सामने से आ रहे ट्रक की हेडलाइट की वजह से मृतक मोटरसाइकिल नहीं रोक पाया हो और दुर्घटना में उसकी भी कुछ भूमिका रही हो।

अदालत ने व्यक्ति की कथित लापरवाही संबंधी इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़क पर किए गए खतरनाक खुदाई कार्य की पर्याप्त निगरानी, समुचित प्रकाश व्यवस्था और त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना बोर्ड की जिम्मेदारी थी। अदालत ने कहा कि व्यक्ति पूरी रात गड्ढे में पड़ा रहा, जो डीजेबी जैसी वैधानिक संस्था द्वारा जनता के प्रति निभाए जाने वाले दायित्व में ''व्यवस्थित और गंभीर विफलता'' को दर्शाता है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता 30 लाख रुपये की एकमुश्त मुआवजा राशि पाने के हकदार हैं। अदालत ने कहा कि हालांकि, चूंकि उन्हें पहले ही डीजेबी से 50,000 रुपये मिल चुके हैं, इसलिए प्रतिवादियों को 29.50 लाख रुपये दुर्घटना की तारीख से भुगतान होने तक छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ तीन महीने के भीतर अदा करने का निर्देश दिया जाता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि डीजेबी अपनी लापरवाही की जिम्मेदारी ठेकेदार पर नहीं डाल सकता, हालांकि अनुबंध की शर्तों के अनुसार वह ठेकेदार से राशि की वसूली के लिए कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। 

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