Edited By Anu Malhotra,Updated: 13 Apr, 2026 02:26 PM

Property Rights India: अक्सर यह सुनने में आता है कि अगर कोई किराएदार किसी मकान या जमीन पर लगातार 12 सालों तक टिका रहे, तो वह उस संपत्ति पर अपना मालिकाना हक जता सकता है। क्या यह सिर्फ एक अफवाह है या इसमें कोई कानूनी सच्चाई भी है? आइए, कानूनी...
Property Rights India: अक्सर यह सुनने में आता है कि अगर कोई किराएदार किसी मकान या जमीन पर लगातार 12 सालों तक टिका रहे, तो वह उस संपत्ति पर अपना मालिकाना हक जता सकता है। क्या यह सिर्फ एक अफवाह है या इसमें कोई कानूनी सच्चाई भी है? आइए, कानूनी विशेषज्ञों के नजरिए से समझते हैं Adverse Possession के पेचीदा नियम।
क्या है एडवर्स पजेशन (Adverse Possession) का नियम?
भारतीय कानून के तहत, सामान्य परिस्थितियों में एक किराएदार कभी भी संपत्ति का मालिक नहीं बन सकता। लेकिन लिमिटेशन एक्ट 1963 के तहत 'एडवर्स पजेशन' यानी 'प्रतिकूल कब्जा' का एक प्रावधान है।
एडवर्स पजेशन की शर्तें:
12 साल की अवधि: यदि कोई व्यक्ति किसी निजी संपत्ति पर लगातार 12 साल तक बिना किसी रोक-टोक के रह रहा है।
-इस पूरी अवधि के दौरान असली मालिक ने संपत्ति पर अपना दावा न किया हो और न ही कोई कानूनी कार्रवाई की हो।
-किराएदार और मालिक के बीच रेंट एग्रीमेंट खत्म हो चुका हो और किराएदार ने लंबे समय से कोई किराया न दिया हो।
-यदि मकान मालिक को अपनी संपत्ति की सुध न हो या वह लंबे समय से लापता हो (जैसे विदेश में बस जाना)।
विशेष नोट: अगर संपत्ति सरकारी है, तो एडवर्स पजेशन के लिए यह समय सीमा 30 वर्ष निर्धारित की गई है।
किराएदार कब कर सकता है मालिकाना हक का दावा?
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दिल्ली हाईकोर्ट के वकील प्रेम जोशी के अनुसार, किराएदार का दावा तभी मजबूत होता है जब वह यह साबित कर दे कि:
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उसने संपत्ति पर खुलेआम कब्जा किया हुआ है (Open Possession)।
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असली मालिक को इस कब्जे की जानकारी थी, फिर भी उसने 12 साल तक उसे हटाने की कोशिश नहीं की।
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संपत्ति पर कब्जे में कोई बाधा नहीं आई (Uninterrupted Possession)।
मकान मालिकों के लिए बचाव के तरीके (Tips for Landlords)
अगर आप अपनी संपत्ति को कब्जे से बचाना चाहते हैं, तो कानूनी रूप से ये कदम उठाना अनिवार्य है:
रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement): हमेशा 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनवाएं और समय-समय पर उसे रिन्यू करवाते रहें। लिखित दस्तावेज यह साबित करता है कि सामने वाला व्यक्ति 'मालिक' नहीं बल्कि 'किराएदार' है। बैंक ट्रांसफर या रसीद के जरिए किराए का रिकॉर्ड रखें। यह सबूत है कि संपत्ति का नियंत्रण आपके पास है। अपनी प्रॉपर्टी पर जाते रहें। अगर किराएदार किराया देने में आनाकानी करे या कब्जा छोड़ने से मना करे, तो तुरंत कानूनी कार्रवाई करें। हमेशा अपनी संपत्ति का टैक्स खुद भरें और उसकी रसीदें संभाल कर रखें।