₹145 Crore FD Scam: ₹145 करोड़ का FD घोटाले का खुलासा, Bank, Officials और Fake Documents का बड़ा कनेक्शन

Edited By Updated: 24 Apr, 2026 07:28 AM

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Rs 145cr FD Fraud: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को पंचकुला नगर निगम से कथित तौर पर धन के गबन से जुड़े 145 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

Rs 145cr FD Fraud: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को पंचकुला नगर निगम से कथित तौर पर धन के गबन से जुड़े 145 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

12 स्थानों पर तलाशी अभियान
ED ने बताया कि चंडीगढ़, पंचकुला, जीरकपुर, डेरा बस्सी और राजपुरा (Patiala) में 12 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया, जिनमें दिलीप कुमार राघव (Customer Relations Manager, Kotak Mahindra Bank), पुष्पेंद्र सिंह (Deputy Vice President, Kotak Mahindra Bank) और विकास कौशिक (Former Senior Accounts Officer, Panchkula Municipal Corporation) से जुड़े परिसर भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत चलाए गए इन तलाशी अभियानों में खरीद-बिक्री समझौतों और कई आपत्तिजनक दस्तावेजों को जब्त किया गया।

ED का मामला पंचकुला स्थित भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज की गई FIR से जुड़ा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधानों का हवाला दिया गया है। FIR में आरोप लगाया गया है कि कोटक महिंद्रा बैंक के अज्ञात अधिकारियों ने सुनियोजित धोखाधड़ी के तहत नगर निगम के फंड का गबन करने की साजिश रची।

 कैसे हुआ घोटाला?
ED की शुरुआती जांच में सामने आया कि नगर निगम के कुछ अधिकारी, बैंक कर्मचारी और निजी लोग मिलकर इस घोटाले को अंजाम दे रहे थे। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों की मदद से पंचकूला नगर निगम के नाम पर दो नकली बैंक खाते खोले। असली खातों से पैसे फर्जी अनुमति पत्रों के जरिए इन खातों में ट्रांसफर किए गए। इन ट्रांजैक्शन को मंजूरी देने के लिए फर्जी ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया गया। 

कहां इस्तेमाल हुआ पैसा?
जांच के अनुसार, ट्रांसफर किए गए पैसे कुछ फाइनेंसरों और अन्य लोगों के खातों में भेजे गए। बाद में यह रकम कथित तौर पर वापस मुख्य आरोपियों तक पहुंचाई गई। इसके अलावा, कुछ पैसा real estate कंपनियों और अन्य निजी व्यक्तियों को भी दिया गया। इतना ही नहीं आरोपियों ने नगर निगम को 16 नकली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें भी दीं। इनमें करीब 145.03 करोड़ रुपये का निवेश और 158.02 करोड़ रुपये की मैच्योरिटी वैल्यू दिखाई गई थी, जो पूरी तरह फर्जी बताई जा रही है।
 

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