Edited By Anu Malhotra,Updated: 14 Feb, 2026 09:55 AM

बेटे की मौत के सवा साल बाद भी सुरेंद्र सिंह इस बात से पूरी तरह अनजान थे कि उनके बेटे ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के माध्यम से केवल 1000 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 20 लाख रुपये का 'पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस' ले रखा था। इस बीमा की जानकारी परिवार को तब...
नेशनल डेस्क: सहारनपुर जिले के नानौता क्षेत्र से मानवता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने न केवल एक बेसहारा पिता को आर्थिक संबल दिया, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास भी बढ़ाया है। गांव तिलफरा निवासी सुरेंद्र सिंह के 21 वर्षीय इकलौते बेटे वंश राणा की अक्टूबर 2024 में देहरादून से लौटते समय एक सड़क हादसे में दर्दनाक मृत्यु हो गई थी। इस सदमे ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया; बेटे के जाने के गम में बीमार हुई माता का भी कुछ समय बाद देहांत हो गया। सुरेंद्र सिंह न केवल अकेले रह गए, बल्कि गहरे आर्थिक संकट में भी फंस गए, क्योंकि बेटे को विदेश भेजने की चाहत में उन्होंने अपना घर और अपनी चार बीघा जमीन पहले ही बेच दी थी। वर्तमान में वह अपनों से दूर अपने ताऊ के बेटे के मकान में शरण लेने को मजबूर थे।
अंधेरे में उम्मीद की किरण बने बैंक अधिकारी
बेटे की मौत के सवा साल बाद भी सुरेंद्र सिंह इस बात से पूरी तरह अनजान थे कि उनके बेटे ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के माध्यम से केवल 1000 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 20 लाख रुपये का 'पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस' ले रखा था। इस बीमा की जानकारी परिवार को तब मिली जब बैंक कर्मचारी नियमित केवाईसी (KYC) प्रक्रिया के दौरान गांव पहुंचे और उन्हें वंश की मृत्यु का पता चला।
हालांकि, दस्तावेजों की जटिलता और प्रक्रिया की जानकारी न होने के कारण गरीब पिता के लिए बीमा राशि का दावा करना लगभग असंभव लग रहा था। ऐसे में नानौता शाखा के प्रबंधक गौरव कुमार ने पहल करते हुए सभी आवश्यक दस्तावेज एकत्र करवाए और उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार प्रक्रिया को तेज किया।
20 लाख रुपये की सहायता और बैंक की अपील
क्षेत्रीय प्रबंधक राजीव रंजन और मुख्य प्रबंधक सचिन देव के विशेष समन्वय से यह बीमा राशि रिकॉर्ड समय में स्वीकृत हो गई और 20 लाख रुपये का चेक सुरेंद्र सिंह के खाते में जमा कर दिया गया। अपनी पूरी जमा-पूंजी और परिवार खो चुके सुरेंद्र सिंह के लिए यह राशि जीवन के कठिन दौर में किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने भावुक होकर बैंक अधिकारियों की इस निस्वार्थ सहायता के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बैंक अधिकारियों ने आम जनता से अपील की कि वे अपनी छोटी-सी बचत से बीमा पॉलिसियां जरूर कराएं, क्योंकि संकट के समय ये मामूली निवेश परिवार के लिए बहुत बड़ा सहारा साबित हो सकते हैं।