शब-ए-बारात पर पटाखों को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट सख्त, रात 10 से सुबह 6 बजे तक पूरी तरह बैन

Edited By Updated: 02 Feb, 2026 06:24 PM

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पश्चिम बंगाल में शब-ए-बारात का पाक त्योहार बुधवार, 3 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने अवैध, प्रतिबंधित और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह पटाखों को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में शब-ए-बारात का पाक त्योहार बुधवार, 3 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने अवैध, प्रतिबंधित और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह पटाखों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि त्योहार के दौरान किसी भी हाल में गैरकानूनी पटाखे फोड़ने की इजाजत नहीं होगी।

हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पटाखों पर पूरी तरह रोक रहेगी। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (WBPCB) और पुलिस यह सुनिश्चित करें कि नियमों का सख्ती से पालन हो। किसी भी तरह के प्रतिबंधित या पर्यावरण-हानिकारक पटाखों के इस्तेमाल पर तुरंत कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कहा कि त्योहार के नाम पर कानून और पर्यावरण से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता को सुरक्षा देने का आदेश

मामले में अदालत ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता और उनके परिवार को शब-ए-बारात के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। याचिकाकर्ता ने शिकायत की थी कि हर साल अवैध पटाखों की वजह से उन्हें और उनके परिवार को शारीरिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है। कोर्ट ने इस शिकायत को गंभीर मानते हुए पुलिस से कहा कि किसी भी तरह की असुविधा न होने दी जाए और मौके पर निगरानी रखी जाए।

रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने पुलिस और WBPCB को आदेश दिया है कि वे अवैध पटाखों पर की गई कार्रवाई और नियमों के पालन की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करें। इस मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में तय की गई है।

शब-ए-बारात पर सार्वजनिक अवकाश

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने 3 फरवरी 2026 को शब-ए-बारात के अवसर पर राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। अदालत का यह आदेश ऐसे समय में आया है जब त्योहारों के दौरान पटाखों से होने वाले प्रदूषण को लेकर पहले से ही सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट्स के सख्त दिशानिर्देश लागू हैं।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर फोकस

कोर्ट ने दोहराया कि पर्यावरण संरक्षण और आम लोगों की सेहत सर्वोपरि है। अब सबकी नजर प्रशासन पर है कि वह इन निर्देशों को जमीन पर कितनी सख्ती से लागू करता है और लोगों को शांति व सुरक्षा के साथ त्योहार मनाने का अवसर मिलता है या नहीं।

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