Edited By Ramanjot,Updated: 02 Feb, 2026 09:44 PM

भारत की डिजिटल सर्विस इकोनॉमी से जुड़े लाखों गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ने अब आर-पार की लड़ाई का फैसला कर लिया है।
नेशनल डेस्क: भारत की डिजिटल सर्विस इकोनॉमी से जुड़े लाखों गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ने अब आर-पार की लड़ाई का फैसला कर लिया है। Gig & Platform Service Workers Union (GIPSWU) के नेतृत्व में 3 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। वर्कर्स का आरोप है कि ऑनलाइन डिलीवरी, राइड-हेलिंग और होम सर्विस प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वालों को न तो स्थिर आय मिलती है, न सुरक्षा और न ही सम्मान। कंपनियां बिना वजह आईडी ब्लॉक कर देती हैं, जिससे एक झटके में रोज़गार छिन जाता है।
किन-किन सेवाओं पर दिखेगा असर?
यूनियन के मुताबिक इस हड़ताल में फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी पार्टनर्स, कैब और बाइक टैक्सी ड्राइवर्स, ब्यूटीशियन, सैलून और स्पा वर्कर्स, घरेलू कामगार, क्लीनिंग स्टाफ, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, एसी टेक्नीशियन, कारपेंटर और अन्य प्लेटफॉर्म-बेस्ड प्रोफेशनल्स शामिल होंगे। इससे पहले 26 जनवरी 2026 को वर्कर्स ने ऐप स्विच-ऑफ हड़ताल की थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने पर अब फिजिकल प्रोटेस्ट का रास्ता चुना गया है।
दिल्ली में जंतर मंतर बना केंद्र
राजधानी दिल्ली में मुख्य प्रदर्शन दोपहर 1 बजे जंतर मंतर पर होगा, जहां सैकड़ों गिग वर्कर्स एकजुट होकर अपनी मांगें उठाएंगे। इसके साथ ही देश के कई बड़े शहरों में भी एकसाथ प्रदर्शन किए जाएंगे।
GIPSWU के गंभीर आरोप
यूनियन ने प्लेटफॉर्म कंपनियों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बिना कारण आईडी सस्पेंड या डिएक्टिवेट करना, रेटिंग और जॉब अलोकेशन सिस्टम में पारदर्शिता की कमी, बेहद कम और अस्थिर कमाई, नियमों में एकतरफा बदलाव और महिला वर्कर्स के साथ कथित उत्पीड़न और शिकायत के बाद आईडी ब्लॉक करना।
क्या चाहते हैं गिग वर्कर्स?
GIPSWU की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह का कहना है कि सरकार से कई बार संवाद की कोशिश हुई, लेकिन समस्याओं को नजरअंदाज किया गया। यूनियन की प्रमुख मांगें हैं गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए अलग केंद्रीय कानून। मनमानी आईडी ब्लॉकिंग पर पूरी तरह रोक। पारदर्शी रेटिंग और भुगतान प्रणाली,
प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र और आंतरिक शिकायत समिति, कार्यस्थल सुरक्षा, मेडिकल इमरजेंसी सपोर्ट और महिला वर्कर्स के लिए विशेष सुविधाएं।
सरकार और कंपनियों पर बढ़ा दबाव
यह हड़ताल सिर्फ एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि गिग इकोनॉमी में बढ़ती असुरक्षा और शोषण के खिलाफ चेतावनी है। करोड़ों यूजर्स जिन ऐप्स पर रोज निर्भर रहते हैं, उन ऐप्स के पीछे काम करने वाले वर्कर्स अब अपने हक के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। अब देखना यह है कि सरकार और प्लेटफॉर्म कंपनियां इस आंदोलन को कितनी गंभीरता से लेती हैं।