Edited By Radhika,Updated: 18 Apr, 2026 03:42 PM

हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का काफी महत्व होता है। इस शुभ दिन को अबूझ मुहूर्त और अटूट फल देने वाला माना जाता है। दरअसल 'अक्षय' शब्द का अर्थ ही है जिसका कभी क्षय न हो, यानी जो कभी समाप्त न हो। इसलिए इस दिन की गई शॉपिंग और भी किया हुए शुभ काम का पुण्य...
नेशनल डेस्क: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का काफी महत्व होता है। इस शुभ दिन को अबूझ मुहूर्त और अटूट फल देने वाला माना जाता है। दरअसल 'अक्षय' शब्द का अर्थ ही है जिसका कभी क्षय न हो, यानी जो कभी समाप्त न हो। इसलिए इस दिन की गई शॉपिंग और भी किया हुए शुभ काम का पुण्य आखिर तक रहता है। इस वर्ष भी लोग सुख-समृद्धि की कामना के साथ कुछ न कुछ नया खरीदने की तैयारी कर रहे हैं।
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क्यों खास है अक्षय तृतीया पर खरीदारी?
ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन अगर घर में कोई बेशकिमती वस्तु लाई जाती है तो उसकी बरतक सारी उम्र बनी रही है। यह दिन न केवल निवेश के लिए बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश के लिए भी महत्वपूर्ण है।

सोना और चांदी दोनों हैं बेहतर ऑप्शन
लोग अक्सर अक्षय तृतीया वाले दिन सोना खरीदना शुभ मानते हैं। ज्योतिष शास्त्रों का माना है कि सोने के अलावा चांदी खरीदना भी उतना ही शुभ होता है।चांदी का संबंध चंद्रमा से है, जो मन को शीतलता और शांति प्रदान करता है। चांदी की कोई वस्तु घर लाने से स्थिरता आती है और आर्थिक संतुलन बना रहता है।

चांदी में क्या खरीदना रहेगा शुभ?
इस दिन सौभाग्य और धन का प्रतीक लक्ष्मी-गणेश की आकृति वाला चांदी का सिक्का सबसे शुभ माना जाता है। इसके अलावा चांदी के बर्तनों में गिलास, कटोरी या चम्मच खरीदना समृद्धि का सूचक माना जाता है। वास्तु शास्त्र में चांदी के बर्तनों का उपयोग घर में अन्न और धन की कमी नहीं होने देता। आप इस दिन पर चांदी की छोटी मूर्ति या आचमनी जैसे पूजा के बर्तन भी खरीदे सकते हैं।
वास्तु के अनुसार कैसे करें स्थापना?
इस शुभ दिन पर खरीदे गए लाकर सीधे तिजोरी में न रखतर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाग इन्हें लाल कपड़े या फिर पीले कपड़े में लपेट कर रखें। अब इस पोटली को पूजा के बाद सिक्के को एक लाल या पीले रेशमी कपड़े में लपेटें। घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में बनी तिजोरी या अलमारी में रखें। वास्तु में ऐसा मानना है कि इस दिशा में कुबेर और धन का आवास होता है।
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खरीदारी के पीछे का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक आधार
चांदी को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। आध्यात्मिक रूप से यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखने और मानसिक शांति को बढ़ावा देने का काम करती है। अतः अक्षय तृतीया जैसे शुभ दिन पर चांदी खरीदना घर में प्रसन्नता और खुशहाली लाने का एक सरल मार्ग है।