डीजे के शोर के मुद्दे पर फडणवीस 'दुविधा में हैं': संजय राउत

Edited By Updated: 07 Sep, 2026 02:11 PM

shiv sena ubt sanjay raut devendra fadnavis dj ban

शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने सोमवार को डीजे प्रतिबंध विवाद को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि फडणवीस इस मुद्दे पर "बीच का रास्ता अपनाकर बैठे हैं" और कार्रवाई करने में विफल रहे हैं, जबकि ध्वनि प्रदूषण...

मुंबई: शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने सोमवार को डीजे प्रतिबंध विवाद को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि फडणवीस इस मुद्दे पर "बीच का रास्ता अपनाकर बैठे हैं" और कार्रवाई करने में विफल रहे हैं, जबकि ध्वनि प्रदूषण को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए राउत ने आरोप लगाया कि पुणे में मुंबई और नागपुर की तुलना में अलग रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुंबई और नागपुर में पुलिस प्रमुखों ने तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम पर पाबंदियां लागू कर दी हैं। 

उन्होंने कहा, "लोग सड़कों पर उतरकर डीजे साउंड सिस्टम से होने वाली शारीरिक और मानसिक परेशानियों के बारे में अपनी बात रख रहे हैं। ये मुद्दे केवल पुणे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र से जुड़े हुए हैं।" राउत ने महाराष्ट्र की मंत्री मेघना बोर्डीकर के भाई की कथित मौत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मेघना बोर्डीकर ने खुद डीजे के शोर से होने वाली परेशानियों के बारे में बात की थी। उन्होंने पिंपरी-चिंचवड़ की एक महिला का भी उल्लेख किया, जिसके बारे में राउत ने दावा किया कि तेज संगीत के कारण पैदा हुई बाधा की वजह से एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच सकी और उसके पिता की उसकी गोद में ही मौत हो गई। 

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने इस विरोध का समर्थन किया है, जबकि फडणवीस हमेशा की तरह इस मुद्दे पर बीच का रास्ता अपनाकर बैठे हुए हैं। राज्यसभा सांसद राउत ने कहा, "अगर मुख्यमंत्री, जो गृह मंत्री भी हैं, किसी सामाजिक मुद्दे पर दुविधा में फंसे रहें और स्थिति को देखते रहें, तो आप कैसे कह सकते हैं कि आप कानून के शासन पर आधारित सरकार चला रहे हैं?" राउत ने कहा कि अगर नागपुर और मुंबई पुलिस ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, तो पुणे को इससे अलग क्यों रखा जाना चाहिए? 

उन्होंने कहा, "पुणे में ऐसा क्या है? क्या मुख्यमंत्री पर किसी तरह का दबाव है? उन्हें इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।" उन्होंने कार्यकर्ता विद्यानंद बापट का मुद्दा भी उठाया। राउत ने दावा किया कि पुलिस की ओर से कथित तौर पर जान को खतरा होने की चेतावनी दिए जाने के बाद बापट रविवार को पुणे में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके। शिवसेना (उबाठा) नेता ने कहा, "अगर पुलिस को किसी जागरूक नागरिक से यह कहना पड़े कि उसकी जान को खतरा है और उसे विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के लिए कहे, तो यह गृह मंत्री की विफलता है।" 

राउत ने पुणे में तर्कवादी कार्यकर्ता नरेन्द्र दाभोलकर की हत्या का भी जिक्र किया और सवाल किया कि क्या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोगों को निशाना बनाने के लिए "अपराधियों और हत्यारों के गिरोह" तैयार किए हैं। उन्होंने गणेश उत्सव को लेकर लोकमान्य तिलक के विचारों का भी जिक्र किया और कहा कि तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम महाराष्ट्र की संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने इसी तरह ठाणे में दही हांडी कार्यक्रम के दौरान नृत्यांगना गौतमी पाटिल के कार्यक्रम जैसे सार्वजनिक प्रदर्शनों की भी आलोचना की और सवाल किया कि क्या इस तरह के आयोजन राज्य की संस्कृति के अनुरूप हैं। राउत ने भाजपा के "हिंदू खतरे में हैं" वाले बयान को खारिज करते हुए कहा कि पुणे में प्रदर्शन करने वाले लोग खुद हिंदुत्व समर्थक हैं, जो सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा, "हिंदू खतरे में नहीं हैं। हिंदू सुरक्षित हैं। किसने कहा कि हिंदू खतरे में हैं? नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं। बालासाहेब ठाकरे असली हिंदू हृदय सम्राट थे।" राउत ने सरकारी कार्यालयों में लगे चित्रों को लेकर चल रहे विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे ऐतिहासिक महापुरुष स्थायी राष्ट्रीय व्यक्तित्व हैं, जबकि राजनीतिक नेताओं के चित्र सरकार बदलने के साथ बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा, "किसी प्रधानमंत्री का चित्र सरकारी कार्यालयों में तब तक लगाया जाता है, जब तक वह उस पद पर रहते हैं। जिस दिन वह प्रधानमंत्री नहीं रहते, उनका चित्र हटा दिया जाता है। लेकिन छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर हमेशा बने रहेंगे।" 

राउत ने शिवसेना कार्यालयों में लगे चित्रों को लेकर दिए गए बयान पर भाजपा नेता और मंत्री आशीष शेलार पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि शेलार को पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यालयों में लगे चित्रों को देखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस का स्वतंत्रता संग्राम, संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन या सीमा विवाद में कोई योगदान नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा का महाराष्ट्र से संबंध केवल सत्ता तक सीमित है। राउत ने कुछ पार्षदों के जाति प्रमाणपत्रों के सत्यापन में राजनीतिक हस्तक्षेप का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों से नेताओं की ओर से संपर्क किया जा रहा है और कुछ लोगों के पक्ष में कार्रवाई करने के लिए उन पर दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सिखाने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों को लेकर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की भी आलोचना की। राउत ने कहा कि सरनाईक को ठाणे में एक कार्यक्रम में बोल रहे अभिनेता संजय दत्त से कहना चाहिए था कि वह महाराष्ट्र में हैं और उन्हें मराठी में बोलना चाहिए।

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!