1980 के बाद पहली बार ऐसा झटका! सोने-चांदी में अचानक भारी गिरावट क्यों आई? जानिए असली वजह

Edited By Updated: 02 Feb, 2026 10:50 AM

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सराफा बाजार में पिछले काफी समय से जारी तेजी पर शुक्रवार को अचानक ब्रेक लग गया और सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। 30 जनवरी को बाजार में जो स्थिति देखी गई, वैसी मंदी 1980 के दशक के बाद पहली बार सामने आई है। सोने के साथ-साथ चांदी और...

नेशनल डेस्क: सराफा बाजार में पिछले काफी समय से जारी तेजी पर शुक्रवार को अचानक ब्रेक लग गया और सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। 30 जनवरी को बाजार में जो स्थिति देखी गई, वैसी मंदी 1980 के दशक के बाद पहली बार सामने आई है। सोने के साथ-साथ चांदी और प्लैटिनम के दाम भी एक ही झटके में काफी नीचे आ गए।

दशकों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट

जनवरी महीने के आखिरी शुक्रवार को सोने की कीमतों में 12 प्रतिशत की बड़ी कमी आई। वहीं चांदी के दाम 26 प्रतिशत तक टूट गए और प्लैटिनम भी 18 प्रतिशत सस्ता हो गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट असामान्य है क्योंकि पिछले एक साल में सोने के दाम लगभग 60 फीसदी तक बढ़ चुके थे। कीमतों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद बाजार में जो अनिश्चितता बनी, उसी का नतीजा इस भारी बिकवाली के रूप में सामने आया है।

मुख्य कारण: बाजार में आई इस उथल-पुथल के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। अमेरिका में केविन वार्श को फेडरल रिजर्व का नया प्रमुख नामित किए जाने की खबर ने निवेशकों के रुख को बदल दिया। इसके अलावा, ईरान के साथ बातचीत के संकेतों और अमेरिकी सरकारी कामकाज ठप होने (ShutDown) का खतरा टलने से भी निवेशकों का डर कम हुआ है। डॉलर की मजबूती और अन्य देशों की मुद्राओं में आई कमजोरी ने भी सोने-चांदी की चमक को कम करने में भूमिका निभाई।

जरूरत से ज्यादा खरीदारी और मुनाफावसूली

तकनीकी जानकारों का कहना है कि सोना और चांदी 'ओवरबॉट' की स्थिति में पहुंच गए थे, यानी इनकी खरीदारी अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा हो चुकी थी। जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं, तो बड़े निवेशकों ने अपना मुनाफा निकालने के लिए ऊंचे दामों पर बिकवाली शुरू कर दी। हालांकि इस बड़ी गिरावट के बावजूद, अगर पूरे महीने का हिसाब देखें तो सोना और चांदी अब भी पिछले महीने के मुकाबले बढ़त पर ही बने हुए हैं।

1980 की ऐतिहासिक गिरावट की कहानी

साल 1980 में चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी थी। इस गिरावट की मुख्य वजह हंट ब्रदर्स माने जाते हैं। 1973 से 1979 के बीच इन दोनों भाइयों ने इतनी बड़ी मात्रा में फिजिकल चांदी खरीद ली थी कि दुनिया की करीब एक-तिहाई चांदी उनके कब्जे में आ गई। इसके चलते चांदी के दामों में जबरदस्त तेजी आई।

हालांकि यह तेजी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई। 1973 में जहां चांदी की कीमत करीब 1.95 डॉलर प्रति औंस थी, वहीं 1980 तक यह बढ़कर लगभग 50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। जब अमेरिकी नियामक संस्थाओं को इस असामान्य तेजी का पता चला, तो उन्होंने मार्जिन से जुड़े नियमों को बेहद सख्त कर दिया। नतीजतन, सिर्फ एक ही दिन में चांदी की कीमत 50 डॉलर से गिरकर करीब 11 डॉलर प्रति औंस रह गई।

इसके बाद साल 2011 में भी चांदी में तेज उछाल देखने को मिला था, लेकिन उस तेजी के बाद कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

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