Gold Silver: सोना-चांदी में लगातार उतार-चढ़ाव... परेशान निवेशकों के लिए राहत, यहां करें निवेश, मिलेगा बेहतर रिटर्न

Edited By Updated: 12 Feb, 2026 06:07 PM

silver prices saw increased interest in multi asset funds after a sharp fall

कीमती धातुओं में तेज उतार-चढ़ाव के बीच मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनकर उभरे हैं। चांदी में भारी गिरावट और सोने की कमजोरी ने एकल निवेश के जोखिम को उजागर किया। ऐसे में इक्विटी, डेट और कमोडिटी में संतुलित निवेश करने वाले...

नेशनल डेस्कः कीमती धातुओं में हालिया उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को बड़ा सबक दिया है। जहां चांदी की रिकॉर्ड तेजी ने निवेशकों को आकर्षित किया, वहीं अचानक आई भारी गिरावट ने जोखिम का एहसास भी करा दिया। ऐसे माहौल में मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स संतुलित और विविधीकृत निवेश के विकल्प के रूप में तेजी से उभर रहे हैं।

25 प्रतिशत की गिरावट

पिछले कुछ महीनों में चांदी ने तिहरे अंकों तक रिटर्न देकर निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। तेजी के इस दौर में बड़ी संख्या में निवेशकों ने चांदी में निवेश बढ़ाया। हालांकि, एक ही कारोबारी दिन में चांदी की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी। इसके बाद सतर्क निवेशकों ने सोने का रुख किया, लेकिन सोना भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहा और हालिया कारोबारी सत्रों में इसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञ पहले से ही चेतावनी देते रहे हैं कि सोना और चांदी जैसी कीमती धातुएं अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाली होती हैं और केवल इन्हीं पर दांव लगाना निवेश के बुनियादी सिद्धांतों के विपरीत है।

ऐसे माहौल में विशेषज्ञों की राय है कि निवेशकों को ऐसे विकल्प चुनने चाहिए जो विविधीकरण के माध्यम से जोखिम को संतुलित करें। मल्टी एसेट एलोकेशन म्यूचुअल फंड्स इसी रणनीति पर आधारित होते हैं।

क्या हैं मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स?

मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स कम से कम तीन अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों—जैसे इक्विटी, डेट और कमोडिटी—में निवेश करते हैं। कमोडिटी में सोना और चांदी भी शामिल हो सकते हैं। सेबी के नियमों के अनुसार, इन फंड्स को कम से कम तीन एसेट क्लास में न्यूनतम 10-10 प्रतिशत निवेश करना अनिवार्य है। फंड मैनेजर बाजार की स्थिति और विभिन्न परिसंपत्तियों के प्रदर्शन के आधार पर निवेश का अनुपात बदल सकते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में इन फंड्स ने उल्लेखनीय रिटर्न दिया है। उदाहरण के तौर पर, निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड ने एक वर्ष में 23.97 प्रतिशत, दो वर्षों में 20.47 प्रतिशत और तीन वर्षों में 22.62 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। वहीं शीर्ष 10 मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स ने पिछले एक वर्ष में औसतन 20.26 प्रतिशत और तीन वर्षों में 21.01 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की है। तुलना करें तो शीर्ष 10 इक्विटी फंड्स का औसत एक वर्षीय रिटर्न 16.62 प्रतिशत रहा है।

क्यों बेहतर रहे ये फंड्स?

इक्विटी बाजारों में अस्थिरता और डेट इंस्ट्रूमेंट्स से अपेक्षाकृत कम रिटर्न के बीच कीमती धातुओं की तेजी ने मल्टी एसेट फंड्स को बढ़त दिलाई। इन फंड्स ने न केवल विविधीकरण का लाभ दिया, बल्कि जोखिम को भी संतुलित रखा। यही वजह है कि इन्होंने कई हाइब्रिड फंड्स से भी बेहतर प्रदर्शन किया।

मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स की खासियत यह है कि निवेशक एक ही योजना के माध्यम से इक्विटी, डेट और कमोडिटी—तीनों में निवेश कर सकते हैं। इससे पोर्टफोलियो अधिक संतुलित बनता है और किसी एक एसेट क्लास में भारी गिरावट का असर सीमित रहता है।

 

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