सोनिया गांधी ने 1980 की मतदाता सूची में नाम शामिल करने से जुड़ी याचिका का किया विरोध

Edited By Updated: 07 Feb, 2026 04:49 PM

sonia gandhi opposed the petition related to the inclusion of her name

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के अधिवक्ता ने शनिवार को दिल्ली की एक अदालत में दावा किया कि 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले उन्हें मतदाता सूची में शामिल करने का आरोप लगाने वाली शिकायत राजनीतिक मकसद से और किसी बाहरी वजह से दायर की गई...

नेशनल डेस्क: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के अधिवक्ता ने शनिवार को दिल्ली की एक अदालत में दावा किया कि 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले उन्हें मतदाता सूची में शामिल करने का आरोप लगाने वाली शिकायत राजनीतिक मकसद से और किसी बाहरी वजह से दायर की गई थी। यह जवाब विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के सामने पेश किया गया, जो 11 सितंबर, 2025 के मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं, जिसमें आरोप की जांच करने से इनकार कर दिया गया था।

जवाब दाखिल किए जाने के बाद अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 21 फरवरी की तारीख तय की। मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में राउज एवेन्यू अदालत की 'सेंट्रल दिल्ली कोर्ट बार एसोसिएशन' के उपाध्यक्ष वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर शिकायत को खारिज कर दिया गया था। शनिवार को सोनिया गांधी की वकील तरन्नुम चीमा, कनिष्का सिंह और आकाश सिंह ने उनका जवाब दाखिल किया, जिसमें दावा किया गया कि आरोप ''पूरी तरह से गलत, बेबुनियाद, राजनीति से प्रेरित और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग हैं।''

याचिका को खारिज करने का अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सही कहा कि नागरिकता के मामले पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि मतदाता सूची विवाद निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र है। जवाब में कहा गया है, ''आपराधिक अदालतें आईपीसी/बीएनएस की धाराओं की आड़ में निजी शिकायतों पर सुनवाई करके इन कामों को अपने हाथ में नहीं ले सकतीं।

यह शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है और संविधान के अनुच्छेद 329 का उल्लंघन होगा, जो चुनावी प्रक्रिया में न्यायिक दखल पर रोक लगाता है।'' इसमें कहा गया कि शिकायत किसी बाहरी वजह से दायर की गई थी और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया गया और कहा गया कि 25 साल पहले उठाए गए विवाद को ''फिर से उठाया जा रहा है।''

जवाब में यह भी कहा गया कि शिकायत में कोई भी बुनियादी दस्तावेज नहीं दिए गए थे। जवाब में यह भी कहा गया कि यह मानना ​​गलत होगा कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि उसने फॉर्म 6 जमा करके नाम शामिल करने के लिए आवेदन किया था। इसमें यह भी कहा गया है, ''40 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद किसी भी व्यक्ति के लिए भरोसेमंद सबूत ढूंढना और रिकॉर्ड पर रखना नामुमकिन होगा।

ऐसे बहुत पुराने आरोपों पर विचार नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इस तरह का दुर्भावनापूर्ण मुकदमा संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) का अक्षरश: उल्लंघन है।'' सितंबर 2025 के अदालत के आदेश में कहा गया था कि शिकायत ''ऐसे आरोपों के जरिए अदालत को अधिकार क्षेत्र देने के मकसद से बनाई गई थी, जो कानूनी तौर पर गलत हैं, उनमें दम नहीं है, और इस मंच के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।''

त्रिपाठी के वकील पवन नारंग ने मजिस्ट्रेट अदालत में आरोप लगाया था कि जनवरी 1980 में सोनिया गांधी का नाम नयी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता के तौर पर जोड़ा गया था, जबकि वह उस समय भारतीय नागरिक नहीं थीं। उन्होंने ''जालसाजी'' और एक सार्वजनिक प्राधिकरण के साथ ''धोखाधड़ी'' का दावा किया था।

बहरहाल, मजिस्ट्रेट ने जांच के अनुरोध वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता अदालत को इस पर राजी कर आपराधिक कानून लागू करना चाहता था कि यह उसके अधिकार क्षेत्र में आता है जबकि कानूनी तौर पर यह अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। 

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