Edited By Ramanjot,Updated: 02 Feb, 2026 05:28 PM

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार, 2 फरवरी 2026, को मेट्रो स्टेशन के नाम बदलने से जुड़ी एक अहम याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने महिपालपुर मेट्रो स्टेशन का नाम ‘रंगपुरी’ करने की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया।
नेशनल डेस्क: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार, 2 फरवरी 2026, को मेट्रो स्टेशन के नाम बदलने से जुड़ी एक अहम याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने महिपालपुर मेट्रो स्टेशन का नाम ‘रंगपुरी’ करने की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि मेट्रो स्टेशनों का नाम तय करना सरकार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) का नीतिगत और प्रशासनिक अधिकार है, जिसमें न्यायपालिका तब तक दखल नहीं दे सकती, जब तक फैसला पूरी तरह मनमाना या संविधान के खिलाफ न हो।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अदालत न तो DMRC और न ही सरकार को स्टेशन का नाम बदलने का कोई सीधा आदेश दे सकती है। नामकरण से जुड़े फैसले पॉलिसी मैटर होते हैं और अदालत का हस्तक्षेप सीमित दायरे में ही संभव है।
हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं की शिकायत को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर DMRC और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे याचिका पर छह सप्ताह के भीतर गंभीरता से विचार करें और जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों से भी राय लें।
याचिका में क्या थी मांग?
यह याचिका रंगपुरी गांव की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि— दिल्ली मेट्रो फेज-4 की गोल्डन लाइन (एयरोसिटी से तुगलकाबाद) पर बनने वाला महिपालपुर मेट्रो स्टेशन जिस जमीन पर विकसित हो रहा है, उसका बड़ा हिस्सा रंगपुरी गांव से संबंधित है। सरकार की नामकरण नीति के अनुसार स्टेशन का नाम उसी क्षेत्र के नाम पर होना चाहिए। RWA ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस मुद्दे को लेकर अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्हें टालमटोल भरे जवाब मिले और जिम्मेदारी एक विभाग से दूसरे विभाग पर डाल दी गई।
क्यों संवेदनशील है यह मामला?
महिपालपुर और रंगपुरी, दोनों ही इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित शहरी गांव हैं। बीते वर्षों में यहां तेजी से विकास हुआ है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय पहचान और नामकरण को लेकर असंतोष भी बढ़ा है। यही वजह है कि मेट्रो स्टेशन के नाम को लेकर यह विवाद सामने आया।
DMRC पर टिकी निगाहें
कोर्ट के फैसले के बाद अब सारा ध्यान DMRC और सरकार के अगले कदम पर है। सवाल यही है कि क्या वे याचिकाकर्ताओं की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे या मौजूदा नाम के साथ ही आगे बढ़ेंगे।
यह फैसला उन लोगों के लिए झटका माना जा रहा है, जो मेट्रो स्टेशनों के नामों में स्थानीय पहचान को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे थे। दिल्ली मेट्रो फेज-4 के कई स्टेशनों को लेकर पहले भी ऐसे विवाद सामने आ चुके हैं।