लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की जांच के निर्देश हुए जारी: सूत्र

Edited By Updated: 10 Feb, 2026 02:31 PM

speaker om birla directs examination of no confidence motion notice

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को सदन के महासचिव को उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस की जांच करने और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है।

नेशनल डेस्क: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को सदन के महासचिव को उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस की जांच करने और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है।

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कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा-

कांग्रेस ने आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस जमा किया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “आज दोपहर 1:14 बजे हमने नियम 94C के तहत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस प्रस्तुत किया है।” कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इस अविश्वास प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।

सूत्रों ने बताया कि विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के आचरण को “खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण” बताते हुए आरोप लगाया है कि विपक्षी दलों के नेताओं को सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा। अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में अध्यक्ष के खिलाफ चार घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

इनमें प्रमुख रूप से यह आरोप शामिल है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। राहुल गांधी ने इस दौरान चीन के साथ 2020 के सैन्य गतिरोध का उल्लेख करते हुए पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला दिया था।

इसके अलावा, विपक्ष ने आठ सांसदों के निलंबन, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर किए गए “आपत्तिजनक और व्यक्तिगत हमलों”, तथा अध्यक्ष ओम बिरला के उस बयान पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किसी अप्रिय घटना की आशंका के चलते सदन में न आने का आग्रह किया था। अध्यक्ष ने कहा था कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक जाकर “अभूतपूर्व घटना” को अंजाम दे सकते हैं।

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मणिकम टैगोर ने लिखा-

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि विपक्ष ने यह कदम “असाधारण परिस्थितियों” में उठाया है। उन्होंने कहा,
“विपक्ष ने संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास जताया है। व्यक्तिगत रूप से हम माननीय अध्यक्ष का सम्मान करते हैं, लेकिन लगातार विपक्षी सांसदों को जनहित के मुद्दे उठाने से रोके जाने से हम आहत और व्यथित हैं। कई वर्षों बाद अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास नोटिस लाया गया है, जो असाधारण परिस्थितियों का परिणाम है।”

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कांग्रेस से अपील की है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले लोकसभा अध्यक्ष को एक औपचारिक पत्र सौंपा जाए। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यदि विपक्ष की अपील पर दो से तीन दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो पार्टी अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेगी।

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अभिषेक बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा-
“हमने पहले भी स्पष्ट किया था कि हमारे सभी सांसद अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगे। लेकिन हमारा सुझाव था कि सांसदों के निलंबन, विपक्ष के नेता को बोलने से रोके जाने, महिला सांसदों पर झूठे आरोप और अध्यक्ष की कथित पक्षपातपूर्ण भूमिका जैसे मुद्दों पर पहले सभी विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक विरोध पत्र अध्यक्ष को दिया जाए। यदि दो-तीन दिनों में कोई कार्रवाई नहीं होती, तो अविश्वास प्रस्ताव लाने का विकल्प खुला है।”

 

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