Edited By Mehak,Updated: 10 Feb, 2026 04:18 PM

अगर आपको डायबिटीज नहीं है और शुगर लेवल भी सामान्य है, लेकिन फिर भी हाथ-पांव में झनझनाहट, सुन्नपन या दर्द रहता है, तो यह पेरिफेरल न्यूरोपैथी हो सकती है। यह बीमारी नसों को प्रभावित करती है और इसके मुख्य कारणों में विटामिन B12 की कमी, रीढ़ की हड्डी की...
नेशनल डेस्क : अगर आपका शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है और आपको डायबिटीज भी नहीं है, लेकिन फिर भी हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या दर्द महसूस होता है, तो यह पेरिफेरल न्यूरोपैथी (Peripheral Neuropathy) की वजह से हो सकता है।
पेरिफेरल न्यूरोपैथी क्या है?
न्यूरोसर्जरी विभाग के एक डाॅक्टर के मुताबिक, पेरिफेरल न्यूरोपैथी में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से बाहर जाने वाली नसों पर असर पड़ता है। जब इन नसों में कोई गड़बड़ी होती है, तो पैरों या हाथों में झनझनाहट, सुन्नपन, जलन या कमजोरी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। यह समस्या केवल डायबिटीज वाले लोगों में ही नहीं, बल्कि सामान्य लोगों में भी हो सकती है।
इस बीमारी के मुख्य कारण
- विटामिन B12 की कमी : शरीर में विटामिन B12 की कमी नसों को नुकसान पहुंचा सकती है।
- स्पाइन की समस्या : रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियां भी नसों पर असर डाल सकती हैं।
- गलत पोश्चर और जीवनशैली : लंबे समय तक डेस्क जॉब करना, एक्सरसाइज न करना और गलत बैठने की आदतें भी पेरिफेरल न्यूरोपैथी का कारण बन सकती हैं।
- ऑटोइम्यून बीमारियां : कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां भी नसों को प्रभावित करती हैं।
पहले यह बीमारी ज्यादातर 50-60 साल से ऊपर के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब 30-40 साल के लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि यह अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे शरीर में इसके संकेत दिखने लगते हैं।
लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें
1. हाथ-पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट
2. पैरों के तलवों में जलन
3. चलने में संतुलन बिगड़ना
4. हाथों में कमजोरी या चीजें पकड़ने में कठिनाई
इलाज कैसे किया जाता है
पेरिफेरल न्यूरोपैथी का इलाज पहले इसके कारण को समझकर किया जाता है:
- विटामिन कमी होने पर : डॉक्टर विटामिन सप्लीमेंट्स और दवाएं देते हैं।
- स्पाइन या रीढ़ से जुड़ी समस्या होने पर : फिजियोथेरेपी, एक्सरसाइज और दवाएं दी जाती हैं।
- दर्द कम करने के लिए : न्यूरोपैथिक पेन की दवाएं दी जाती हैं।
डॉ. कहते हैं कि समय पर इलाज और जीवनशैली में बदलाव करके इस बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित एक्सरसाइज, संतुलित आहार और सही पोश्चर अपनाना बेहद जरूरी है।