Edited By Anu Malhotra,Updated: 16 Oct, 2026 09:38 AM

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि वह भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन (उपग्रह संचार) क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है - जिसमें एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भी शामिल है। साथ ही, कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र...
नई दिल्ली: रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि वह भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन (उपग्रह संचार) क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है - जिसमें एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भी शामिल है। साथ ही, कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र में काम करने वाली हर कंपनी को कानून और देश के मौजूदा नियमों का पालन करना होगा।
'X' (ट्विटर) पर जारी बयान में कहा गया, "रिलायंस और भारतीय बाजार को लेकर हाल ही में की गई टिप्पणियों के संदर्भ में, हम तथ्यों को स्पष्ट करना चाहते हैं। हर भारतीय कंपनी की तरह, रिलायंस भी ऐसे भारत में विकसित हुई है जो निवेश और नवाचार (इनोवेशन) का स्वागत करता है - चाहे वह देश का हो या विदेश का - बशर्ते उससे लोगों के जीवन में सुधार आए। यह खुलापन कानून के शासन (rule of law) पर टिका है। जैसा कि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है, वह हर आवेदक के लिए - चाहे वह भारतीय हो या विदेशी - एक जैसी प्रक्रिया अपनाती है। जियो की अपनी सैटेलाइट सेवाओं को भी अभी मंजूरियों का इंतजार है।"
बयान में आगे कहा गया, "रिलायंस में, हमने कभी प्रतिस्पर्धा से परहेज नहीं किया है। हम इसे इस बात की सबसे सटीक परीक्षा मानते हैं कि कौन ग्राहकों को सबसे बेहतर सेवा देता है। जियो खुद 2016 में भारत के बेहद प्रतिस्पर्धी टेलीकॉम बाजार में एक नई कंपनी के तौर पर उतरी थी, तब हमारे पास एक भी ग्राहक नहीं था। महज दस वर्षों में, जियो ने 530 मिलियन से अधिक ग्राहकों का भरोसा जीता है और भारतीयों को दुनिया का बेहतरीन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सबसे किफायती डेटा उपलब्ध कराया है। हम सैटेलाइट कम्युनिकेशन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करते हैं, जिसमें स्टारलिंक भी शामिल है। जियो सहित हर कंपनी को भारत के लोगों की सेवा करनी चाहिए और देश के कानूनों व नीतियों का पालन करना चाहिए।"
रिलायंस की यह प्रतिक्रिया तब आई है, जब स्पेसएक्स (SpaceX) के सीईओ एलन मस्क ने भारतीय कंपनी समूह (रिलायंस) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि कुछ निहित स्वार्थ वाले लोग स्टारलिंक की इस क्षेत्र में एंट्री को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। X पर एक पोस्ट में, मस्क ने कहा, "अंबानी की इंटरनेट पर मौजूद 'प्रचारकों की फौज' के बेतुके तर्कों का कोई मतलब नहीं है। एक तरफ, वे कहते हैं कि स्टारलिंक भारत में अंबानी की एकाधिकार (मोनोपोली) वाली स्थिति के सामने, उनकी बेहद कम कीमतों का मुकाबला नहीं कर सकता। और दूसरी ही सांस में, वे यह भी दावा करते हैं कि स्टारलिंक एक बहुत बड़ा और मजबूत प्रतियोगी साबित होगा! यह सरासर पाखंड और बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात है।"
उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से मौजूदा कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनका कारोबार ही खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने लिखा, "असल बात तो यह है कि प्रतिस्पर्धा से भारत के आम नागरिकों को फायदा ही होगा, क्योंकि उन्हें चुनने के लिए और ज्यादा विकल्प मिलेंगे- जैसा कि हमेशा होता है। अंबानी का मुनाफा भले ही कम हो जाए, लेकिन उनका कारोबार बंद नहीं होने वाला है।" इससे पहले, मस्क ने भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में एकाधिकार वाली प्रथाओं का आरोप लगाया था और स्टारलिंक की कमर्शियल शुरुआत के रास्ते में आ रही रेगुलेटरी रुकावटों पर सवाल उठाए थे।
मस्क ने पोस्ट किया, "आदरणीय प्रधानमंत्री अंबानी, कृपया मेरी विनम्र माफ़ी स्वीकार करें कि मुझे यह समझ नहीं आया कि आप ही भारत के असली बॉस हैं। जाहिर है, आप भारत के महान लोगों का अपने एकाधिकार के जरिए शोषण करना जारी रखना चाहेंगे, लेकिन क्या आप फिर भी स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देने पर विचार करेंगे?"
इस बीच, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सैटेलाइट संचार के क्षेत्र में किसी भी तरह के एकाधिकार (मोनोपोली) की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने बताया कि कमर्शियल लाइसेंस के लिए अंतिम मंजूरी पाने की कतार में तीन कंपनियां शामिल हैं। सिंधिया ने कहा कि भारत सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए मूल्य निर्धारण ढांचे (प्राइसिंग फ्रेमवर्क) पर अंतिम निर्णय लेने के करीब है। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि कमर्शियल कामकाज शुरू करने से पहले स्टारलिंक सहित सभी लाइसेंस प्राप्त ऑपरेटरों को सुरक्षा संबंधी शर्तों को पूरा करना होगा।