वैज्ञानिक दृष्टिकोण और 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना वाली पीढ़ियां तैयार करें शिक्षक: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

Edited By Updated: 05 Sep, 2026 01:34 PM

teachers should groom generations with a spirit of nation first droupadi murmu

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षकों से विद्यार्थियों की ऐसी पीढ़ियां तैयार करने का शनिवार को आह्वान किया जिनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण हो और जो ''राष्ट्र सर्वोपरि'' की भावना से आगे बढ़ें। मुर्मू ने शिक्षक दिवस के अवसर पर लिखे एक लेख में कहा कि...

नई दिल्लीः राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षकों से विद्यार्थियों की ऐसी पीढ़ियां तैयार करने का शनिवार को आह्वान किया जिनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण हो और जो ''राष्ट्र सर्वोपरि'' की भावना से आगे बढ़ें। मुर्मू ने शिक्षक दिवस के अवसर पर लिखे एक लेख में कहा कि विद्यार्थियों को अच्छा व्यक्ति बनाना शिक्षक का पावन कर्तव्य है। राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिकता के पथ पर चलते हुए समृद्धि और यश प्राप्त करने वाले विद्यार्थी ही शिक्षक की सफलता के जीवंत प्रतिमान होते हैं।

उन्होंने कहा कि देश सामाजिक समावेश के साथ विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ''मैं चाहूंगी कि विकास यात्रा के इस क्रम में हमारे शिक्षकगण ऐसी पीढ़ियों का निर्माण करें जो हमारी संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझें, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ मानवता के हित में कार्य करें, अंत्योदय के आदर्शों को आत्मसात करें, पर्यावरण और सभी जीव-जंतुओं के संरक्षण में सक्रिय रहें, व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों में उत्कर्ष प्राप्त करें तथा 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना से आगे बढ़ें।'' 'शिक्षक गढ़ते कल का भारत' शीर्षक वाले लेख में राष्ट्रपति ने कहा कि माता-पिता और अभिभावक बड़े विश्वास के साथ अपने बच्चों को शिक्षकों के पास भेजते हैं।

उन्होंने कहा, ''वे यह मानकर चलते हैं कि शिक्षक अपनेपन की भावना से बच्चों की सुरक्षा और प्रगति पर ध्यान देंगे। इस पवित्र आस्था की रक्षा करना प्रत्येक शिक्षक का धर्म है।'' राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षक की भावना, आचरण और व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे बच्चों में भय और आशंका पैदा न हो, उनका मनोबल न टूटे तथा उनमें हीन भावना विकसित न हो।

उन्होंने कहा कि अच्छे शिक्षक यह सुनिश्चित करते हैं कि विद्यार्थी अपने सर्वोत्तम स्वरूप को प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहित करना, उनमें जिज्ञासा उत्पन्न करना, प्रश्न करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देना, उनकी तर्क और निर्णय क्षमता को विकसित करना तथा उनके स्वतंत्र व्यक्तित्व के निर्माण में मदद करना शिक्षण के सबसे उपयोगी और प्रेरक आयामों में शामिल हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, ''ऐसी प्रेरक शिक्षा से ही सफल उद्यमियों, प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों, सृजनशील कलाकारों और उभरती चुनौतियों के नवीन समाधान प्रस्तुत करने वाले नागरिकों की पीढ़ियां तैयार होंगी।'' राष्ट्रपति मुर्मू अपने शिक्षकों की भूमिका का उल्लेख करते हुए ने कहा कि स्नेही और समर्पित शिक्षक विद्यार्थियों में असीम क्षमता और प्रेरणा का संचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रोत्साहन से विद्यार्थियों में जीवन की कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने का साहस और बड़े से बड़े लक्ष्य को हासिल करने का आत्मविश्वास पैदा होता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम ही नहीं पढ़ाते, बल्कि अपने आचरण और उदाहरण से विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। राष्ट्रपति ने कहा, ''मेरा सभी देशवासियों से अनुरोध है कि वे निष्ठावान और समर्पित शिक्षकों के प्रति सदैव सम्मान की भावना रखें। मेरी कामना है कि हमारे समर्पित शिक्षकों के योगदान से भारत पढ़े और बहुत आगे बढ़े।'' 
 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!