15-45 उम्र के पुरुषों में बढ़ रहा है Testicular Cancer का खतरा, इन 6 शुरुआती लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Edited By Updated: 13 Apr, 2026 06:01 PM

testicular cancer symptoms

Testicular Cancer Symptoms: पुरुषों में 15 से 45 वर्ष की आयु के बीच टेस्टिकुलर कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अंडकोष में बिना दर्द वाली गांठ, सूजन, भारीपन या पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द इसके मुख्य शुरुआती लक्षण हो...

Testicular Cancer Symptoms : कैंसर के बदलते स्वरूपों के बीच पुरुषों में टेस्टिकुलर कैंसर (अंडकोष का कैंसर) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। आमतौर पर 15 से 45 वर्ष की आयु के पुरुषों को प्रभावित करने वाला यह कैंसर जितना गंभीर है, समय पर पहचान होने पर इसका इलाज उतना ही सफल भी है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के हालिया आंकड़ों के अनुसार, अकेले अमेरिका में इसके लगभग 9,810 नए मामले दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण अक्सर लोग इसके शुरुआती संकेतों को पहचान नहीं पाते, जो आगे चलकर जानलेवा साबित हो सकते हैं। 

क्या है टेस्टिकुलर कैंसर? 

यह कैंसर अंडकोष (Testis) में विकसित होता है, जो स्क्रोटम (अंडकोश की थैली) के भीतर स्थित होते हैं। इनका मुख्य कार्य शरीर में स्पर्म (शुक्राणु) और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण करना है। 

सावधान! इन संकेतों को पहचानें 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में होने वाले निम्नलिखित बदलाव टेस्टिकुलर कैंसर का इशारा हो सकते हैं: 

अंडकोष में भारीपन: निचले हिस्से या अंडकोष में लगातार खिंचाव या भारीपन महसूस होना, जैसे कि वहां वजन बढ़ गया हो। 

बिना दर्द वाली गांठ: अंडकोष में मटर या कंचे के आकार की छोटी सी गांठ का होना सबसे प्राथमिक लक्षण है। चूंकि इसमें दर्द नहीं होता, इसलिए लोग इसे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। 

सूजन और आकार में बदलाव: एक अंडकोष का अचानक बड़ा हो जाना या उसमें बिना किसी चोट के सूजन आना खतरे की घंटी हो सकता है। 

छाती में संवेदनशीलता: दुर्लभ मामलों में, हार्मोनल असंतुलन के कारण पुरुषों की छाती में सूजन या दर्द महसूस हो सकता है। 

पेट और कमर में दर्द: पेट के निचले हिस्से, ग्रोइन (जांघ और पेट के बीच का हिस्सा) या कमर में लगातार हल्का दर्द बना रहना। 

असहजता या सुन्नपन: अंडकोष में जलन, हल्का दर्द या सुन्नपन महसूस होना जो बार-बार लौटकर आता हो। 

समय पर जांच ही बचाव है 

डॉक्टरों का मानना है कि यदि शुरुआती स्टेज में ही गांठ या सूजन का पता चल जाए, तो इलाज की सफलता दर बहुत अधिक होती है। "सेल्फ-एग्जामिनेशन" (खुद से जांच करना) इसका सबसे सरल उपाय है। यदि किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखे, तो बिना झिझक यूरोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
 

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