Edited By Pardeep,Updated: 07 Jan, 2026 10:28 PM

देश के आम बजट 2026 को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। बुधवार को संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) की अहम बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इस बैठक में संसद के आगामी बजट सत्र की तारीखों को मंजूरी दे दी गई।
नेशनल डेस्कः देश के आम बजट 2026 को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। बुधवार को संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) की अहम बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इस बैठक में संसद के आगामी बजट सत्र की तारीखों को मंजूरी दे दी गई।
बजट सत्र दो हिस्सों में होगा
CCPA बैठक में तय किया गया कि बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाएगा:
पहला चरण
दूसरा चरण
राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी शुरुआत
बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी। इसके बाद बजट पर चर्चा और अन्य विधायी कामकाज होगा
1 फरवरी 2026 को पेश होगा बजट, वो भी रविवार को
1 फरवरी 2026 (रविवार) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में आम बजट पेश करेंगी। यह भारत के संसदीय इतिहास में पहली बार होगा जब आम बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा।
क्यों खास है 1 फरवरी 2026?
साल 2017 से लगातार 1 फरवरी को बजट पेश किया जा रहा है। 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहली बार 1 फरवरी को बजट पेश किया था। उससे पहले बजट 28 फरवरी को आता था। इस बार 1 फरवरी रविवार को पड़ रहा है। इसी दिन गुरु रविदास जयंती भी है
बजट सत्र के दूसरे हिस्से में क्या होगा?
बजट सत्र के दूसरे चरण में विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा होगी। वित्त विधेयक (Finance Bill) पारित किया जाएगा। सरकार के खर्च और कर प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी दी जाएगी
निर्मला सीतारमण रचेंगी इतिहास
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लगातार 9वीं बार बजट पेश करेंगी। इसके साथ ही वह लगातार सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी।
अब तक का रिकॉर्ड
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मोरारजी देसाई – 10 बार बजट
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पी. चिदंबरम – 9 बार बजट
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प्रणब मुखर्जी – 8 बार बजट
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2025 में निर्मला सीतारमण ने 8वां बजट पेश कर प्रणब मुखर्जी की बराबरी की थी
विकसित भारत @2047 पर रहेगा फोकस
सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस बजट सत्र का मुख्य फोकस “विकसित भारत @2047” के विजन को आगे बढ़ाने पर होगा। इसमें आर्थिक विकास,रोजगार,इंफ्रास्ट्रक्चर,सामाजिक कल्याण और और दीर्घकालिक सुधारों पर जोर दिया जा सकता है।