चिंता का विषय लोकसभा सीट की संख्या नहीं, बल्कि यह है कि किसे 'अनुचित' लाभ होगा : सिद्धरमैया

Edited By Updated: 05 Apr, 2026 08:59 PM

the matter of concern is not the number of lok sabha seats

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने लोकसभा सीटों के संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हालिया टिप्पणियों को लेकर कटाक्ष करते हुए रविवार को कहा कि चिंता का विषय यह नहीं है कि निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढ़ रही है या नहीं, बल्कि यह है कि यह...

नेशनल डेस्क : कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने लोकसभा सीटों के संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हालिया टिप्पणियों को लेकर कटाक्ष करते हुए रविवार को कहा कि चिंता का विषय यह नहीं है कि निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढ़ रही है या नहीं, बल्कि यह है कि यह बढ़ोतरी किस तरीके से की जा रही है और किसे ''अनुचित'' लाभ मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण भारत के लोगों का विश्वास जीतने में ''विफल'' रहने के बाद, मोदी सरकार अब ''प्रतिनिधित्व के जोड़-तोड़ को नया रूप देने'' के माध्यम से इस क्षेत्र की आवाज को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि दक्षिण भारत के जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है, उनमें लोकसभा सीटों की संख्या कम नहीं की जाएगी और देश भर के राज्यों को लाभ पहुंचाने के लिए सीटों की कुल संख्या में वृद्धि की जाएगी। मोदी ने केरल के तिरुवल्ला में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि बृहस्पतिवार को स्थगित लोकसभा और राज्यसभा की बैठक 16 अप्रैल को तीन दिनों के लिए फिर से बुलाई जाएगी और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए लोकसभा सीट को 543 से बढ़ाकर 816 करने सहित कई विधेयकों पर विचार करेंगी।

सिद्धरमैया ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आखिरकार बोलने का मैं स्वागत करता हूं। दक्षिणी राज्यों को आश्वस्त करने की यह अचानक चिंता राजनेता के तौर पर कम तथा केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राजनीतिक गणनाओं के अनुरूप चुनाव-प्रेरित संदेश अधिक प्रतीत होती है।'' उन्होंने कहा, ''हम स्पष्ट करते हैं कि मुद्दा कभी दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीट की संख्या में बढ़ोतरी करने का नहीं रहा है। चिंता इस बात को लेकर है कि यह वृद्धि कैसे होती है - और इससे असमान रूप से किसे लाभ मिलता है।''

मुख्यमंत्री ने कहा कि हालांकि, हर राज्य में वृद्धि देखने को मिल सकती है, लेकिन वृद्धि की दर और पैमाना स्पष्ट रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों के पक्ष में है। उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 (मौजूदा सीट से 40 अधिक), महाराष्ट्र में 48 से बढ़कर 72, बिहार में 40 से बढ़कर 60, मध्यप्रदेश में 29 से बढ़कर 43-44 , राजस्थान में 25 से बढ़कर 37-38 और गुजरात में 26 से बढ़कर 39 होने की उम्मीद है।''

सिद्धरमैया ने कहा कि कर्नाटक में लोकसभा सीटों की संख्या 28 से बढ़कर 42, तमिलनाडु में 39 से बढ़कर 58-59, आंध्र प्रदेश में 25 से बढ़कर 37-38, तेलंगाना में 17 से बढ़कर 25-26, और केरल में 20 से बढ़कर 30 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े खुद ही सब कुछ बयां करते हैं। पांच दक्षिणी राज्यों को मिलाकर मुश्किल से 63-66 अतिरिक्त सीटें बढ़ती दिख रही हैं, जबकि भाजपा शासित उक्त सात राज्यों को ही लगभग 128-131 सीटें मिलती नजर आ रही हैं, यानी लगभग दोगुनी।

सिद्धरमैया ने दलील दी कि लोकसभा की सीट की संख्या 816 होने के बाद भी दक्षिणी राज्यों का सामूहिक हिस्सा लगभग 24 प्रतिशत ''अपरिवर्तित'' बना रहेगा। सिद्धरमैया ने दावा किया कि जनसंख्या नियंत्रण और शासन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को दंडित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक राष्ट्रीय विकास का एक प्रमुख संवाहक रहा है लेकिन उसे जानबूझकर दरकिनार किए जाने का खतरा है।

मुख्यमंत्री ने सवाल किया, ''यदि बड़े राज्यों का संख्यात्मक प्रभुत्व बढ़ता जा रहा है और इस प्रक्रिया में हमारा हिस्सा नहीं बढ़ता है, तो कर्नाटक को इस प्रक्रिया से क्या लाभ हो रहा है?'' उन्होंने कहा, ''कर्नाटक की जनता और संघवाद में विश्वास रखने वाले सभी लोग निष्पक्षता, सम्मान और पारदर्शिता के हकदार हैं। हम अपनी आवाज को कमजोर करने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करेंगे।" 

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