Edited By Rohini Oberoi,Updated: 29 Mar, 2026 03:56 PM

रक्षक ही जब भक्षक की भूमिका में दिखने लगे या अपराधियों के साथ 'दोस्ती' की पींगें बढ़ाने लगे तो सिस्टम पर सवाल उठना लाजिमी है। बेंगलुरु पुलिस के एक इंस्पेक्टर पर शहर की कथित 'लेडी डॉन' के साथ आपत्तिजनक चैट्स और ऑडियो क्लिप्स के जरिए नजदीकियां बढ़ाने...
नेशनल डेस्क। रक्षक ही जब भक्षक की भूमिका में दिखने लगे या अपराधियों के साथ 'दोस्ती' की पींगें बढ़ाने लगे तो सिस्टम पर सवाल उठना लाजिमी है। बेंगलुरु पुलिस के एक इंस्पेक्टर पर शहर की कथित 'लेडी डॉन' के साथ आपत्तिजनक चैट्स और ऑडियो क्लिप्स के जरिए नजदीकियां बढ़ाने के गंभीर आरोप लगे हैं। इंस्पेक्टर महिला से जिद करते सुनाई देते हैं कि वह उन्हें 'सर' न कहे, बल्कि प्यार से 'पापू' बुलाए। इस मामले ने कर्नाटक पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पापू और डालू का पूरा विवाद?
एक रिपोर्ट के अनुसार मामला कोनानकुंटे इलाके के इंस्पेक्टर पापन्ना से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर कुछ ऑडियो क्लिप्स और व्हाट्सएप चैट्स वायरल हुए हैं जिनमें इंस्पेक्टर कथित तौर पर यशस्विनी गौड़ा (जिसे शहर की लेडी डॉन कहा जाता है) से बात कर रहे हैं।
वायरल क्लिप के मुख्य अंश:
इंस्पेक्टर महिला से जिद करते सुनाई देते हैं कि वह उन्हें 'सर' न कहे, बल्कि प्यार से 'पापू' बुलाए। वह महिला को 'डालू' कहकर संबोधित करते हैं और उसे मिलने के लिए घर बुलाने की बात करते हैं। महिला का दावा है कि जब उसने इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया तो उसे धमकाया और परेशान किया गया।
पुलिस विभाग का पक्ष
इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में दो गुट बन गए हैं। जहां एक तरफ वर्दी पर दाग लगने की बात हो रही है वहीं पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह पूरा मामला एक सोची-समझी साजिश हो सकता है। सूत्रों का दावा है कि ये चैट्स और ऑडियो करीब 8 साल पुराने हैं जिन्हें अब इंस्पेक्टर की छवि खराब करने के लिए वायरल किया जा रहा है। विभाग को शक है कि ऑडियो क्लिप्स के साथ छेड़छाड़ (Editing) की गई हो सकती है।
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कमिश्नर ने दिए जांच के आदेश
बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) के आदेश दे दिए हैं। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि आरोपी महिला की ओर से अभी तक कोई औपचारिक (Formal) लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
वर्दी की साख पर सवाल
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है बल्कि उस खाकी वर्दी का है जिस पर जनता भरोसा करती है। अगर एक अधिकारी अपराधियों के साथ इस तरह के निजी संवाद करता है तो कानून व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठना तय है। जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि 'पापू' की यह प्रेम कहानी हकीकत है या किसी को फंसाने का जाल।