हमारे मछुआरे सिर्फ समुद्र के योद्धा नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव हैं: प्रधानमंत्री मोदी

Edited By Updated: 29 Mar, 2026 06:22 PM

pm modi fishermen are not just sea warriors but pillars of atmanirbhar bharat

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को देश के ''मेहनतकश परिश्रमी मछुआरों'' की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे सिर्फ ''समुद्र के योद्धा'' नहीं हैं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की एक मजबूत नींव भी हैं।

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को देश के ''मेहनतकश परिश्रमी मछुआरों'' की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे सिर्फ ''समुद्र के योद्धा'' नहीं हैं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की एक मजबूत नींव भी हैं। अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के दौरान मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि चाहे बंदरगाहों का विकास हो या मछुआरों के लिए बीमा, ऐसी कई पहल है जो उनके बहुत काम आ रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ''हमारे मछुआरे भाई-बहन न केवल समुद्र के योद्धा हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव भी हैं। वे सुबह होने से पहले समंदर की लहरों से जूझते हुए अपने परिवार के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में जुट जाते हैं।'' मोदी ने स्वीकार किया कि मौसम के रुख का मछुआरों की समुद्री गतिविधियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए तकनीकी प्रगति के माध्यम से उन्हें पूरा सहयोग दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ''मुझे बेहद खुशी है कि इन प्रयासों से न केवल हमारे मत्स्य पालन क्षेत्र में सुधार हो रहा है, बल्कि कुछ नया करने का जज्बा भी भर रहा है।'' मोदी ने कहा कि आज मत्स्य पालन क्षेत्र और समुद्री शैवाल (सीवीड) के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग हो रहे हैं और हमारे मछुआरे भाई-बहन आत्मनिर्भर बन रहे हैं। उन्होंने कुछ उदाहरण भी दिया जैसे कि ओडिशा के संबलपुर की सुजाता भूयान नाम की एक गृहणी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''सुजाता भूयान कुछ नया करके अपने परिवार की और मदद करना चाहती थीं।

इसलिए कुछ वर्ष पहले उन्होंने हीराकुंड जलाशय में मत्स्य पालन शुरू किया। शुरुआती दिन उनके लिए आसान नहीं थे। मौसम में होने वाले बदलाव, मछलियों के खाने का प्रबंध और घर की जिम्मेदारियों के साथ संतुलन बनाने जैसी कई चुनौतियां थीं, लेकिन उनका हौसला अडिग था। केवल दो-तीन वर्ष के भीतर उन्होंने अपने प्रयास को एक फलते-फूलते व्यवसाय में बदल दिया।''

उन्होंने कहा, ''लक्षद्वीप में मिनीकॉय के हाव्वा गुलजार जी की कहानी हमारी माताओं-बहनों की अद्भुत संकल्प-शक्ति को सामने लाती है। दरअसल वे एक मत्स्य प्रसंस्करण इकाई चलाती थीं। लेकिन उन्हें लगा कि उनके पास अगर एक अच्छा 'कोल्ड स्टोरेज' हो तो वे और बेहतर कर सकती हैं, इसलिए उन्होंने 'कोल्ड स्टोरेज' लगाने का फैसला किया। आज यही उनकी ताकत बन चुका है। अब वे बेहतर योजना के साथ कारोबार कर पा रही हैं।'' उन्होंने कहा कि बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार ने पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुना।

इसके लिए उन्होंने एक 'पॉन्ड फार्म' बनाया। इस कारोबार के लिए उन्हें प्रशिक्षण भी मिला। अब अपने तालाब से मछलियों की बिक्री कर वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''इसका उन्हें बड़ा लाभ भी हो रहा है। मैं एक बार फिर मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों की सराहना करता हूं। हमारी अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए उनका प्रयास बेहद प्रशंसनीय है।'' भूयान ने कहा, "मुझे बहुत खुशी हो रही है क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री ने मेरी और मेरे काम की सराहना की है। मैंने 2022 में मछली पालन शुरू किया था और अब सालाना सात से आठ लाख रुपये कमा रही हूं।''

भूयान ने उनके प्रयासों को पहचानने के लिए मोदी और उनके समर्थन के लिए ओडिशा सरकार को धन्यवाद दिया। अपने रेडियो कार्यक्रम के दौरान, मोदी ने ओडिशा के केंद्रपाड़ा के प्रकाश रथ का भी उल्लेख किया जिन्होंने महिला नेतृत्व वाले विकास को आगे बढ़ाने के तरीकों पर अपने विचार प्रकट किए हैं। इस बीच, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी 'मन की बात' कार्यक्रम में भूयान और रथ की सफलता की कहानी का जिक्र करने के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''यह पूरे ओडिशा के लोगों के लिए गर्व की बात है।'' उन्होंने कहा, ''भूयान ने 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' (पीएमएमएसवाई) का लाभ उठाते हुए हीराकुड जलाशय में 'पिंजरा संस्कृति' के माध्यम से मछली पालन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आज वह लगभग 25 से 30 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन करके और सालाना आठ से 10 लाख रुपये कमाकर दूसरों के लिए एक मिसाल कायम कर रही हैं।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि गृहिणी से आत्मनिर्भर उद्यमी बनीं सुजाता की यह प्रेरणादायक यात्रा राज्य की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगी।

माझी ने सुजाता को उनकी निरंतर मेहनत और सफलता के लिए बधाई दी और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार की 'माई भारत बजट क्वेस्ट' प्रतियोगिता में लगभग 12 लाख युवाओं ने भाग लिया है। हालांकि, 'महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास' पर ओम प्रकाश रथ के निबंध में प्रस्तुत विचार और विश्लेषण ने प्रधानमंत्री को प्रभावित किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर लिखा, ''ओम प्रकाश रथ के निबंध की सराहना हमारे राज्य की युवा प्रतिभा की बौद्धिक क्षमता को दर्शाती है। मैं उन्हें इस सफलता के लिए हार्दिक बधाई देता हूं।'' 

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